राहु नवग्रह मंत्र
अर्धकायं महावीर्यं चंद्रादित्य विमर्दनम्। सिंहिकागर्भ सम्भूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम्॥
राहु द्वारा सूर्य-चंद्र पर पड़ने वाले ग्रहण तुल्य दोषों (अर्थात जीवन में जब सब कुछ अंधकारमय लगे) से त्वरित मुक्ति तथा अज्ञात शत्रुओं व भय के समूल नाश हेतु यह पौराणिक मंत्र सिद्ध है। 13
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
राहु द्वारा सूर्य-चंद्र पर पड़ने वाले ग्रहण तुल्य दोषों (अर्थात जीवन में जब सब कुछ अंधकारमय लगे) से त्वरित मुक्ति तथा अज्ञात शत्रुओं व भय के समूल नाश हेतु यह पौराणिक मंत्र सिद्ध है। 13
इस मंत्र से क्या होगा?
राहु द्वारा सूर्य-चंद्र पर पड़ने वाले ग्रहण तुल्य दोषों (अर्थात जीवन में जब सब कुछ अंधकारमय लगे) से त्वरित मुक्ति तथा अज्ञात शत्रुओं व भय के समूल नाश हेतु यह पौराणिक मंत्र सिद्ध है
जाप विधि
नित्य रात्रि के समय या सूर्यास्त के पश्चात एक सौ आठ बार इस श्लोक का पाठ करें। 12
विशेष टिप्पणियाँ
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