राहु नवग्रह मंत्र
ॐ भृगुपुत्राय विद्महे सैंहिकेयाय धीमहि तन्नो राहुः प्रचोदयात्।
राजनैतिक षड्यंत्रों से बचाव, कूटनीतिक सफलता और समाज के निचले तबके या रहस्यमयी लोगों से लाभ प्राप्ति हेतु। 16
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
राजनैतिक षड्यंत्रों से बचाव, कूटनीतिक सफलता और समाज के निचले तबके या रहस्यमयी लोगों से लाभ प्राप्ति हेतु। 16
इस मंत्र से क्या होगा?
राजनैतिक षड्यंत्रों से बचाव, कूटनीतिक सफलता और समाज के निचले तबके या रहस्यमयी लोगों से लाभ प्राप्ति हेतु
जाप विधि
शनिवार रात्रि दक्षिण-पश्चिम मुख होकर एक सौ आठ बार जप। 16
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ॐ स्वस्ति मात्र उत पित्रे नो अस्तु स्वस्ति गोभ्यो जगते पुरुषेभ्यः । विश्वं सुभूतं सुविदत्रं नो अस्तु ज्योगेव दृशेम सूर्यम् ॥
shanti mantraॐ आप्यायन्तु ममाङ्गानि वाक्प्राणश्चक्षुः श्रोत्रमथो बलमिन्द्रियाणि च सर्वाणि । सर्वं ब्रह्मोपनिषदं माहं ब्रह्म निराकुर्यां मा मा ब्रह्म निराकरोदनिराकरणमस्त्वनिराकरणं मे अस्तु । तदात्मनि निरते य उपनिषत्सु धर्मास्ते मयि सन्तु ते मयि सन्तु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
stotra mantraमामुग्रधर्मादखिलात् प्रमादान्नारायणः पातु नरश्च हासात्। दत्तस्त्वयोगादथ योगनाथः पायाद् गुणेशः कपिलः कर्मबन्धात्।। 7
dhyan mantraध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्। वामाङ्कारूढ सीतामुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं नानालङ्कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डनं रामचन्द्रम्॥
ugra mantraॐ लां लाकिन्यै नमः
beej mantraहुं