ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
केतु

केतु नवग्रह मंत्र

ॐ केतुं कृण्वन्नकेतवे पेशो मर्या अपेशसे। समुषद्भिरजायथा:।।

केतु जनित अज्ञात और संक्रामक रोगों (जैसे गंभीर एलर्जी, वायरस, तंत्रिका तंत्र की दुर्बलता), जोड़ों के भयंकर दर्द, कालसर्प दोष के मारक प्रभाव (पुच्छ भाग), और अकारण शत्रुओं की वृद्धि के समूल शमन हेतु। इस

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारनवग्रह मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

केतु जनित अज्ञात और संक्रामक रोगों (जैसे गंभीर एलर्जी, वायरस, तंत्रिका तंत्र की दुर्बलता), जोड़ों के भयंकर दर्द, कालसर्प दोष के मारक प्रभाव (पुच्छ भाग), और अकारण शत्रुओं की वृद्धि के समूल शमन हेतु। इसके अतिरिक्त आध्यात्मिक वैराग्य, मोक्ष, गूढ़ विद्याओं (Occult sciences, Astrology) में सर्वोच्च सिद्धि और ध्यान में असीमित एकाग्रता प्राप्त करने हेतु यह वैदिक मंत्र अचूक है। 1

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

केतु जनित अज्ञात और संक्रामक रोगों (जैसे गंभीर एलर्जी, वायरस, तंत्रिका तंत्र की दुर्बलता), जोड़ों के भयंकर दर्द, कालसर्प दोष के मारक प्रभाव (पुच्छ भाग), और अकारण शत्रुओं की वृद्धि के समूल शमन हेतु

02

इसके अतिरिक्त आध्यात्मिक वैराग्य, मोक्ष, गूढ़ विद्याओं (Occult sciences, Astrology) में सर्वोच्च सिद्धि और ध्यान में असीमित एकाग्रता प्राप्त करने हेतु यह वैदिक मंत्र अचूक है

जाप विधि

मंगलवार अथवा गुरुवार को रात्रिकाल में, अश्विनी, मघा या मूल नक्षत्र में दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर मुख करके अनुष्ठान प्रारंभ करें। धूम्र वर्ण (कत्थई या भूरे) के आसन पर बैठकर लहसुनिया (Cat’s eye) या रुद्राक्ष की माला से चालीस दिनों के भीतर सत्रह हजार मंत्रों का जप पूर्ण करें। अनुष्ठान उपरांत कुशा (डाभ) की समिधा और घृत से दशांश हवन का विधान है। 1

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