निराकार परब्रह्म (हंस / सोऽहम्) ध्यान मंत्र
सोऽहम्
व्यक्तिगत चेतना (अहं) और सार्वभौमिक चेतना (तत्) के मध्य अद्वैत बोध की प्राप्ति, मन का स्वतः शांत होना, और आत्म-साक्षात्कार।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
व्यक्तिगत चेतना (अहं) और सार्वभौमिक चेतना (तत्) के मध्य अद्वैत बोध की प्राप्ति, मन का स्वतः शांत होना, और आत्म-साक्षात्कार।
इस मंत्र से क्या होगा?
व्यक्तिगत चेतना (अहं) और सार्वभौमिक चेतना (तत्) के मध्य अद्वैत बोध की प्राप्ति, मन का स्वतः शांत होना, और आत्म-साक्षात्कार
जाप विधि
सुखासन या पद्मासन में बैठकर रीढ़ सीधी रखें। आंतरिक दृष्टि भ्रूमध्य पर केंद्रित करें। श्वास अंदर लेते समय 'सो' (So) और बाहर छोड़ते समय 'हम्' (Ham) का मानसिक अजपा जप (बिना होंठ हिलाए) करें।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ ह्रीं मैं भीमाय नमः
siddh mantraॐ गरुडाय हुं
stotra mantraआयुर्नश्यति पश्यतां प्रतिदिनं यातं यौवनं प्रत्यायान्ति गताः पुनर्न दिवसाः कालो जगद्भक्षकः। लक्ष्मीस्तोयतरङ्गभङ्गचपला विद्युच्चलं जीवितं तस्मान्मां शरणागतं शरणद त्वं रक्ष रक्षाधुना॥ 21
vaidik mantraॐ त्वामग्ने पुष्करादध्यथर्वा निरमन्थत । मूर्ध्नो विश्वस्य वाघतः ॥
naam mantraपाशपाणि
shanti mantraॐ आप्यायन्तु ममाङ्गानि वाक्प्राणश्चक्षुः श्रोत्रमथो बलमिन्द्रियाणि च सर्वाणि । सर्वं ब्रह्मोपनिषदं माहं ब्रह्म निराकुर्यां मा मा ब्रह्म निराकरोदनिराकरणमस्त्वनिराकरणं मे अस्तु । तदात्मनि निरते य उपनिषत्सु धर्मास्ते मयि सन्तु ते मयि सन्तु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥