निराकार परब्रह्म (हंस / सोऽहम्) ध्यान मंत्र
सोऽहम्
व्यक्तिगत चेतना (अहं) और सार्वभौमिक चेतना (तत्) के मध्य अद्वैत बोध की प्राप्ति, मन का स्वतः शांत होना, और आत्म-साक्षात्कार।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
व्यक्तिगत चेतना (अहं) और सार्वभौमिक चेतना (तत्) के मध्य अद्वैत बोध की प्राप्ति, मन का स्वतः शांत होना, और आत्म-साक्षात्कार।
इस मंत्र से क्या होगा?
व्यक्तिगत चेतना (अहं) और सार्वभौमिक चेतना (तत्) के मध्य अद्वैत बोध की प्राप्ति, मन का स्वतः शांत होना, और आत्म-साक्षात्कार
जाप विधि
सुखासन या पद्मासन में बैठकर रीढ़ सीधी रखें। आंतरिक दृष्टि भ्रूमध्य पर केंद्रित करें। श्वास अंदर लेते समय 'सो' (So) और बाहर छोड़ते समय 'हम्' (Ham) का मानसिक अजपा जप (बिना होंठ हिलाए) करें।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
वैद्यनाथ
shanti mantraॐ सह नाववतु । सह नौ भुनक्तु । सह वीर्यं करवावहै । तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
vaidik mantraॐ अग्निमीळे पुरोहितं यज्ञस्य देवमृत्विजम् । होतारं रत्नधातमम् ॥
tantrik mantraॐ ह्रीं श्रीं क्लीं भुवनेश्वर्यै नमः
navgrah mantraॐ वृषभध्वजाय विद्महे घृणिहस्ताय धीमहि तन्नो गुरुः प्रचोदयात्।
jap mantraॐ सिद्धि वराय नमः