वैदिक देवता (वरुण) नाम मंत्र
पाशपाणि
ब्रह्मांडीय नियमों (ऋत) का पालन, दंड से बचाव एवं पापों से मुक्ति।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
ब्रह्मांडीय नियमों (ऋत) का पालन, दंड से बचाव एवं पापों से मुक्ति।
इस मंत्र से क्या होगा?
ब्रह्मांडीय नियमों (ऋत) का पालन, दंड से बचाव एवं पापों से मुक्ति
जाप विधि
नियम भंग होने के भय के समय सतर्कता हेतु जप।
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कालीं कूर्चं परं नाम दक्षिणे दक्षिणे कालिके तता । वशिष्ठ मन्त्रं प्रोच्च्यार्थ मोचय दयमीश्वरि कालीं कूर्चं परे निरमेशास्याश्चापहारिणी ॥ कालीं भीमं ठटं भद्रकाली भीमं शिवस्यहि शापं मोचय युग्मापो विध्येयं चापहारिणी ॥
mool mantraॐ श्रीं ह्रीं सं सं ह्रीं श्रीं संकर्षणाय ॐ
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kaamya mantraॐ क्लीं श्रीं ह्रीं जूं ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ देवकी सुत गोविंद वासुदेव जगत्पते देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॐ स्वः भुवः भूः ॐ जूं ह्रीं श्रीं क्लीं ॐ।
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