वैदिक देवता (वरुण) नाम मंत्र
पाशपाणि
ब्रह्मांडीय नियमों (ऋत) का पालन, दंड से बचाव एवं पापों से मुक्ति।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
ब्रह्मांडीय नियमों (ऋत) का पालन, दंड से बचाव एवं पापों से मुक्ति।
इस मंत्र से क्या होगा?
ब्रह्मांडीय नियमों (ऋत) का पालन, दंड से बचाव एवं पापों से मुक्ति
जाप विधि
नियम भंग होने के भय के समय सतर्कता हेतु जप।
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ॐ नमो भगवते रूद्राय
dhyan mantraध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचंद्रावतंसं रत्नाकल्पोज्ज्वलांगं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्। पद्मासीनं समंतात्स्थितममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानं विश्वाद्यं विश्वबीजं निखिलभयहरं पंचवक्त्रं त्रिनेत्रम्॥
vaidik mantraॐ सहस्रशीर्षा पुरुषः सहस्राक्षः सहस्रपात् । स भूमिं विश्वतो वृत्वात्यतिष्ठद्दशांगुलम् ॥
beej mantraग्रां
stotra mantraचक्रं युगान्तानलतिग्मनेमि भ्रमत् समन्ताद् भगवत्प्रयुक्तम्। दन्दग्धि दन्दग्ध्यरिसैन्यमासु कक्षं यथा वातसखो हुताशः।। 7
kaamya mantraॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥