वैदिक देवता (वरुण) नाम मंत्र
पाशपाणि
ब्रह्मांडीय नियमों (ऋत) का पालन, दंड से बचाव एवं पापों से मुक्ति।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
ब्रह्मांडीय नियमों (ऋत) का पालन, दंड से बचाव एवं पापों से मुक्ति।
इस मंत्र से क्या होगा?
ब्रह्मांडीय नियमों (ऋत) का पालन, दंड से बचाव एवं पापों से मुक्ति
जाप विधि
नियम भंग होने के भय के समय सतर्कता हेतु जप।
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ॐ क्लीं श्रीं ह्रीं जूं ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ देवकी सुत गोविंद वासुदेव जगत्पते देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॐ स्वः भुवः भूः ॐ जूं ह्रीं श्रीं क्लीं ॐ।
siddh mantraॐ क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं हूं हूं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं हूं हूं स्वाहा ॥
ugra mantraॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥
vaidik mantraॐ सहस्रशीर्षा पुरुषः सहस्राक्षः सहस्रपात् । स भूमिं विश्वतो वृत्वात्यतिष्ठद्दशांगुलम् ॥
stotra mantraविज्ञानवृद्धिं हृदये कुरु श्रीः सौभाग्यवृद्धिं कुरु मे गृहे श्रीः । दयासुवृद्धिं कुरुतां मयि श्रीः सुवर्णवृद्धिं कुरु मे गृहे श्रीः ॥ 27
navgrah mantraॐ भार्गवाय विद्महे असुराचार्याय धीमहि तन्नः शुक्रः प्रचोदयात्।