उद्देश्य अनुसार मंत्र
मातृका देवी / वर्णेश्वरी (अनाहत चक्र की पंखुड़ियाँ) बीज
मातृका देवी / वर्णेश्वरी (अनाहत चक्र की पंखुड़ियाँ) बीज बीज मंत्र
कं, खं, गं, घं, ङं, चं, छं, जं, झं, ञं, टं, ठं
दिव्य प्रेम, अपार करुणा, और भय-मुक्त अवस्था की प्राप्ति 3।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
प्रकारबीज मंत्र
प्रयोजन
यह मंत्र क्यों?
दिव्य प्रेम, अपार करुणा, और भय-मुक्त अवस्था की प्राप्ति 3।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
दिव्य प्रेम, अपार करुणा, और भय-मुक्त अवस्था की प्राप्ति
जाप विधि
हृदय चक्र की बारह पंखुड़ियों का ध्यान करते हुए जप 2।
विशेष टिप्पणियाँ
इसे भी पढ़ें
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
siddh mantra
ॐ प्रं प्राप्त्यै नमः स्वाहा ।
ugra mantraॐ ह्रीं बं बटुकाय मम आपत्ति उद्धारणाय। कुरु कुरु बटुकाय बं ह्रीं ॐ फट स्वाहा
jap mantraअंजनीगर्भित संभूत कपूर रामप्रिय नमस्तुभ्यं हनुमं रक्ष सर्वदा
navgrah mantraॐ कया नश्चित्र आ भुवदूती सदावृध: सखा। कया शचिष्ठया वृता।।
bhakti mantraहरि ओम तत्सत जय गुरु दत्त
shanti mantraॐ सह नाववतु । सह नौ भुनक्तु । सह वीर्यं करवावहै । तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥