उद्देश्य अनुसार मंत्र
मातृका देवी / वर्णेश्वरी (अनाहत चक्र की पंखुड़ियाँ) बीज
मातृका देवी / वर्णेश्वरी (अनाहत चक्र की पंखुड़ियाँ) बीज बीज मंत्र
कं, खं, गं, घं, ङं, चं, छं, जं, झं, ञं, टं, ठं
दिव्य प्रेम, अपार करुणा, और भय-मुक्त अवस्था की प्राप्ति 3।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारबीज मंत्र
प्रयोजन
यह मंत्र क्यों?
दिव्य प्रेम, अपार करुणा, और भय-मुक्त अवस्था की प्राप्ति 3।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
दिव्य प्रेम, अपार करुणा, और भय-मुक्त अवस्था की प्राप्ति
जाप विधि
हृदय चक्र की बारह पंखुड़ियों का ध्यान करते हुए जप 2।
विशेष टिप्पणियाँ
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