ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
मातृका देवी / वर्णेश्वरी (अनाहत चक्र की पंखुड़ियाँ) बीज

मातृका देवी / वर्णेश्वरी (अनाहत चक्र की पंखुड़ियाँ) बीज बीज मंत्र

कं, खं, गं, घं, ङं, चं, छं, जं, झं, ञं, टं, ठं

दिव्य प्रेम, अपार करुणा, और भय-मुक्त अवस्था की प्राप्ति 3।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारबीज मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

दिव्य प्रेम, अपार करुणा, और भय-मुक्त अवस्था की प्राप्ति 3।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

दिव्य प्रेम, अपार करुणा, और भय-मुक्त अवस्था की प्राप्ति

जाप विधि

हृदय चक्र की बारह पंखुड़ियों का ध्यान करते हुए जप 2।

विशेष टिप्पणियाँ

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