मातृका देवी / वर्णेश्वरी (अनाहत चक्र की पंखुड़ियाँ) बीज बीज मंत्र
कं, खं, गं, घं, ङं, चं, छं, जं, झं, ञं, टं, ठं
दिव्य प्रेम, अपार करुणा, और भय-मुक्त अवस्था की प्राप्ति 3।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
दिव्य प्रेम, अपार करुणा, और भय-मुक्त अवस्था की प्राप्ति 3।
इस मंत्र से क्या होगा?
दिव्य प्रेम, अपार करुणा, और भय-मुक्त अवस्था की प्राप्ति
जाप विधि
हृदय चक्र की बारह पंखुड़ियों का ध्यान करते हुए जप 2।
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gyan mantraॐ अर्हं मुखकमलवासिनी पापात्मक्षयंकारी वद वद वाग्वादिनी सरस्वती ऐं ह्रीं नमः स्वाहा ॥
sabar mantraओम नमो आदेश गुरु जी को आदेश पहला गण गणपति 14 विद्या सारथी जति सती कैलाशपति बल भीम मारुती आले विघ्न निवारी साईं गोरखनाथ की दुआही गुरु की शक्ति मेरी भक्ति चले मंत्र ईश्वरी वाचा पिंड कच्चा गुरु गोरखनाथ का शब्द सच्चा 24
bhakti mantraगोपाला गोपाला देवकीनन्दन गोपाला
kaamya mantraया श्रीः स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मीः पापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धिः। श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा तां त्वां नताः स्म परिपालय देवि विश्वम्॥
mool mantraॐ वायुदेवाय नमः