मातृका देवी / वर्णेश्वरी (अनाहत चक्र की पंखुड़ियाँ) बीज बीज मंत्र
कं, खं, गं, घं, ङं, चं, छं, जं, झं, ञं, टं, ठं
दिव्य प्रेम, अपार करुणा, और भय-मुक्त अवस्था की प्राप्ति 3।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
दिव्य प्रेम, अपार करुणा, और भय-मुक्त अवस्था की प्राप्ति 3।
इस मंत्र से क्या होगा?
दिव्य प्रेम, अपार करुणा, और भय-मुक्त अवस्था की प्राप्ति
जाप विधि
हृदय चक्र की बारह पंखुड़ियों का ध्यान करते हुए जप 2।
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ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्। वामाङ्कारूढ सीतामुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं नानालङ्कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डनं रामचन्द्रम्॥
mool mantraॐ भ्रं भैरवाय नमः
vaidik mantraॐ परोऽपेहि मनस्पाप किमशस्तानि शंससि । परेहि न त्वा कामये वृक्षान् वनानि सं चर गृहेषु गोषु मे मनः ॥
navgrah mantraॐ सों सोमाय नमः
stotra mantraनम: कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठनिभाय च। नमो घोराय रौद्राय भीषणाय कपालिने॥ तपसा दग्धदेहाय नित्यं योगरताय च । 43
kaamya mantraॐ ह्रीं हूं हां ग्रें क्षों क्रों नमः॥