ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
भगवान काल भैरव बीज

भगवान काल भैरव बीज बीज मंत्र

क्रीं

यह काल भैरव का परम शक्तिशाली तांत्रिक बीज है। यह मृत्यु और समय के भय से मुक्ति, बुरी नजर व प्रेत बाधाओं से परम रक्षा, विरोधियों का शमन और तांत्रिक ऊर्जाओं (Black magic) से बचाव के लिए प्रयुक्त होता है

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारबीज मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

यह काल भैरव का परम शक्तिशाली तांत्रिक बीज है। यह मृत्यु और समय के भय से मुक्ति, बुरी नजर व प्रेत बाधाओं से परम रक्षा, विरोधियों का शमन और तांत्रिक ऊर्जाओं (Black magic) से बचाव के लिए प्रयुक्त होता है 10।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

यह काल भैरव का परम शक्तिशाली तांत्रिक बीज है

02

यह मृत्यु और समय के भय से मुक्ति, बुरी नजर व प्रेत बाधाओं से परम रक्षा, विरोधियों का शमन और तांत्रिक ऊर्जाओं (Black magic) से बचाव के लिए प्रयुक्त होता है

जाप विधि

मंगलवार, शनिवार या अमावस्या को रात्रिकाल में, काले या लाल वस्त्र धारण कर, दक्षिण दिशा में मुख करके रुद्राक्ष या हकीक की माला से 108 बार जप करें 10।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

jap mantra

ॐ नमः शिवाय

kavach mantra

श्रीम क्लीम सरस्वती बुद्ध जन्य स्वाहा सततम मंत्र राजोयम दक्षिणे मां सदावतु ऐम ह्रीम श्रीम क्लीम त्र्यक्षरो मंत्रो नैऋत्यम सर्वदावतु ओम ऐकवासिन्य स्वाहा मां वारुणेवतु ओम सर्वांबिकाय स्वाहा वायव्यमा सदावतु ओम ऐम श्रीम क्लीम गद्यवासिन्य स्वाहा माम उत्तरेवतु ऐम सर्वशास्त्र वासिन्ये स्वाहान्य सदा ओम ह्रीम सर्व पूजिता स्वाहा चोरध्वं सदावतु ओम ह्रीम पुस्तक वासिन्य स्वाहा धोमांम सदावतु ओम ग्रंथ बीज स्वरूपाय स्वाहा मां सर्वतो वतु इति कथित विप्र ब्राह्म मंत्र विग्रहम इदम विश्व जयं नाम कवचम ब्रह्म रूपकम पंचलक्ष जपे नैव सिद्धमु कवचम भवे यदि सिद्ध कवचो बृहस्पति समो भवे महा वाग्मी कविंद्र त्रैलोक्य विजयी भवेत 27

ugra mantra

ॐ क्रीं हूं क्रीं सर्व शत्रु स्तंभिनी घोर कालिकायै फट्

dhyan mantra

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥

stotra mantra

ॐ नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते । शंख चक्र गदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ 29

shanti mantra

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः । सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु । मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥