भद्रा मेधा देवी (महानारायण उपनिषद्) ज्ञान मंत्र
मेधादेवी जुषमाणा न आगाद्विश्वाची भद्रा सुमनस्य माना । त्वया जुष्टा नुदमाना दुरुक्तान् बृहद्वदेम विदथे सुवीराः । त्वया जुष्ट ऋषिर्भवति देवि त्वया ब्रह्माऽऽगतश्रीरुत त्वया । त्वया जुष्टश्चित्रं विन्दते वसु सा नो जुषस्व द्रविणो न मेधे ॥
ऋषि-तुल्य ज्ञान, ब्रह्मविद्या, श्रेष्ठ वाक्-कौशल और प्रज्ञा का पूर्ण विकास 2।
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यह मंत्र क्यों?
ऋषि-तुल्य ज्ञान, ब्रह्मविद्या, श्रेष्ठ वाक्-कौशल और प्रज्ञा का पूर्ण विकास 2।
इस मंत्र से क्या होगा?
ऋषि-तुल्य ज्ञान, ब्रह्मविद्या, श्रेष्ठ वाक्-कौशल और प्रज्ञा का पूर्ण विकास
जाप विधि
महानारायण उपनिषद् वर्णित पूर्ण मेधा सूक्त का नित्य सस्वर पाठ 2।
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