मन / मनस्पाप निवारण (६.४५.१) वैदिक मंत्र
ॐ परोऽपेहि मनस्पाप किमशस्तानि शंससि । परेहि न त्वा कामये वृक्षान् वनानि सं चर गृहेषु गोषु मे मनः ॥
मन में उठने वाले पाप-समूहों का निष्कासन, अप्रशस्त (अशुभ) कामनाओं से स्थायी मुक्ति एवं वैराग्य भाव।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
मन में उठने वाले पाप-समूहों का निष्कासन, अप्रशस्त (अशुभ) कामनाओं से स्थायी मुक्ति एवं वैराग्य भाव।
इस मंत्र से क्या होगा?
मन में उठने वाले पाप-समूहों का निष्कासन, अप्रशस्त (अशुभ) कामनाओं से स्थायी मुक्ति एवं वैराग्य भाव
जाप विधि
जब मन में दुर्विचार, कामुकता या नकारात्मक भावनाएँ उत्पन्न हों, तब इस मंत्र का कम से कम ११ बार मानसिक जप करें।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ सह नाववतु । सह नौ भुनक्तु । सह वीर्यं करवावहै । तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
sabar mantraॐ नमो आदेश गुरु का आदेश काली काली महाकाली इन्द्र की बेटी ब्रम्हा की साली चाम की गठरी हाड़ की माला भजो आनन्द सुंदरी बाला। भरपूर वसन करले उठाई काम क्रन्ति कलिका आई लुच्ची मोहन भोग भेट कड़ाही जहा भेजा वहा जाई कष्ट दुखो से लेव बचाई सभी देत्यन को मार भगाई आदि अंत तू रही सहाई में पूत तू मेरी माई सब दुखन से लेव बचाई गुरु की शक्ति हमारी भक्ति फुरे मंत्र दोहाई काली की ईश्वरो वाचा 12
tantrik mantraॐ धूं धूं धूमावती ठ: ठ: ठ: स्वाहा
bhakti mantraॐ सूर्याय नमः
mool mantraश्री राम जय राम कोदण्ड राम
kaamya mantraॐ जूं सः माम्पालय पालय सः जूं ॐ