ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
बटुक भैरव

बटुक भैरव जप मंत्र

ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा

आकस्मिक व जीवनघाती विपत्तियों (आपदाओं) से तत्काल रक्षा, शत्रु शमन और निर्भीकता की प्राप्ति। 69

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारजप मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

आकस्मिक व जीवनघाती विपत्तियों (आपदाओं) से तत्काल रक्षा, शत्रु शमन और निर्भीकता की प्राप्ति। 69

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

आकस्मिक व जीवनघाती विपत्तियों (आपदाओं) से तत्काल रक्षा, शत्रु शमन और निर्भीकता की प्राप्ति

जाप विधि

२१ या ४० दिन की साधना, रुद्राक्ष या हकीक माला, रात्रि ९ से १२ बजे के मध्य। 69

विशेष टिप्पणियाँ

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श्रीम क्लीम सरस्वती बुद्ध जन्य स्वाहा सततम मंत्र राजोयम दक्षिणे मां सदावतु ऐम ह्रीम श्रीम क्लीम त्र्यक्षरो मंत्रो नैऋत्यम सर्वदावतु ओम ऐकवासिन्य स्वाहा मां वारुणेवतु ओम सर्वांबिकाय स्वाहा वायव्यमा सदावतु ओम ऐम श्रीम क्लीम गद्यवासिन्य स्वाहा माम उत्तरेवतु ऐम सर्वशास्त्र वासिन्ये स्वाहान्य सदा ओम ह्रीम सर्व पूजिता स्वाहा चोरध्वं सदावतु ओम ह्रीम पुस्तक वासिन्य स्वाहा धोमांम सदावतु ओम ग्रंथ बीज स्वरूपाय स्वाहा मां सर्वतो वतु इति कथित विप्र ब्राह्म मंत्र विग्रहम इदम विश्व जयं नाम कवचम ब्रह्म रूपकम पंचलक्ष जपे नैव सिद्धमु कवचम भवे यदि सिद्ध कवचो बृहस्पति समो भवे महा वाग्मी कविंद्र त्रैलोक्य विजयी भवेत 27

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कं, खं, गं, घं, ङं, चं, छं, जं, झं, ञं, टं, ठं