शांति एवं सद्भाव जप मंत्र
ॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै। तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
गुरु-शिष्य के मध्य सामंजस्य, द्वेष का समूल नाश, विश्व शांति और मानवता का कल्याण। 2
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
गुरु-शिष्य के मध्य सामंजस्य, द्वेष का समूल नाश, विश्व शांति और मानवता का कल्याण। 2
इस मंत्र से क्या होगा?
गुरु-शिष्य के मध्य सामंजस्य, द्वेष का समूल नाश, विश्व शांति और मानवता का कल्याण
जाप विधि
१०८ बार या वेदाध्ययन/साधना के पूर्व एवं पश्चात जप, स्फटिक या रुद्राक्ष माला। 2
विशेष टिप्पणियाँ
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ॐ अक्षरेस्वराय विद्महे मन्त्रराजाय धीमहि तन्नो हयग्रीवः प्रचोदयात् ॥
mool mantraश्री राम जय राम कोदण्ड राम
kaamya mantraॐ श्रीं महालक्ष्म्यै स्वाहा।
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sabar mantraॐ पीर बजरंगी राम लक्ष्मण के संगी, जहां जहां जाए, फतह के डंके बजाये, दुहाई माता अञ्जनि की आन 9
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