ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
शांति एवं सद्भाव

शांति एवं सद्भाव जप मंत्र

ॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै। तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

गुरु-शिष्य के मध्य सामंजस्य, द्वेष का समूल नाश, विश्व शांति और मानवता का कल्याण। 2

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारजप मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

गुरु-शिष्य के मध्य सामंजस्य, द्वेष का समूल नाश, विश्व शांति और मानवता का कल्याण। 2

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

गुरु-शिष्य के मध्य सामंजस्य, द्वेष का समूल नाश, विश्व शांति और मानवता का कल्याण

जाप विधि

१०८ बार या वेदाध्ययन/साधना के पूर्व एवं पश्चात जप, स्फटिक या रुद्राक्ष माला। 2

विशेष टिप्पणियाँ

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शम्भुर्मे मस्तकं पातु मुखं पातु महेश्वरः। दन्तपङ्क्तिं च नीलकण्ठोऽप्यधरोष्ठं हरः स्वयम्। कण्ठं पातु चन्द्रचूडः स्कन्धौ वृषवाहनः। वक्षःस्थलं नीलकण्ठः पातु पृष्ठं दिगम्बरः। स्वप्ने जागरणे चैव स्थाणुर्मे पातु सन्ततम्। 8

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