शांति एवं सद्भाव जप मंत्र
ॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै। तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
गुरु-शिष्य के मध्य सामंजस्य, द्वेष का समूल नाश, विश्व शांति और मानवता का कल्याण। 2
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
गुरु-शिष्य के मध्य सामंजस्य, द्वेष का समूल नाश, विश्व शांति और मानवता का कल्याण। 2
इस मंत्र से क्या होगा?
गुरु-शिष्य के मध्य सामंजस्य, द्वेष का समूल नाश, विश्व शांति और मानवता का कल्याण
जाप विधि
१०८ बार या वेदाध्ययन/साधना के पूर्व एवं पश्चात जप, स्फटिक या रुद्राक्ष माला। 2
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ॐ
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