भुवनेश्वरी महाविद्या सिद्ध मंत्र
ॐ ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः
ब्रह्मांड की रानी (Queen of the Universe) की शक्तियों का आह्वान 11। यह मंत्र गंभीर आर्थिक संकटों, दरिद्रता, मानसिक तनाव और वैवाहिक जीवन की बाधाओं को नष्ट करता है 30। यह साधक को अपार आकर्षण शक्ति, सफलत
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
ब्रह्मांड की रानी (Queen of the Universe) की शक्तियों का आह्वान 11। यह मंत्र गंभीर आर्थिक संकटों, दरिद्रता, मानसिक तनाव और वैवाहिक जीवन की बाधाओं को नष्ट करता है 30। यह साधक को अपार आकर्षण शक्ति, सफलता, और असीम शांति के साथ-साथ आध्यात्मिक मोक्ष प्रदान करता है 30।
इस मंत्र से क्या होगा?
ब्रह्मांड की रानी (Queen of the Universe) की शक्तियों का आह्वान 11
यह मंत्र गंभीर आर्थिक संकटों, दरिद्रता, मानसिक तनाव और वैवाहिक जीवन की बाधाओं को नष्ट करता है 30
यह साधक को अपार आकर्षण शक्ति, सफलता, और असीम शांति के साथ-साथ आध्यात्मिक मोक्ष प्रदान करता है
जाप विधि
भुवनेश्वरी यंत्र, देवी का चित्र और स्फटिक की माला का उपयोग आवश्यक है 30। घी का दीपक और धूप जलाकर 'हं', 'ईं', 'रं' बीजों से ऋष्यादि और हृदयादि न्यास संपन्न किए जाते हैं 30। साधक को पीले वस्त्र धारण कर प्रातःकाल शांत मन से जप करना चाहिए 31।
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ह्लीं
dhyan mantraअहं ब्रह्मास्मि
vaidik mantraॐ समानो मन्त्रः समितिः समानी समानं मनः सह चित्तमेषाम् । समानं मन्त्रमभि मन्त्रये वः समानेन वो हविषा जुहोमि ॥
sabar mantraओम चौकी हनुमत वीर की बाण ध्वजा फहराए मारू मारू मारुत सुत मुष्टिक शत्रु नसाय मेरे इष्ट रामचंद्र जी अगुवा हनुमंता वीर चौकी सुदर्शन चक्र की रक्षा करें शरीर टोना ब्रह्म भूत प्रेत संग डाईन डाकिनी सांप बिच्छू चोर बट सब कुछ निष्फल जाई 6
kavach mantraॐ सौवर्णासन-संस्थितां त्रिनयनां पीतांशुकोल्लासिनीम्। हेमाभांगरुचिं शशांक-मुकुटां सच्चम्पक स्रग्युताम्।। हस्तैर्मुद्गर पाश वज्ररसनाः संबिभ्रतीं भूषणैः। व्याप्तांगीं बगलामुखीं त्रिजगतां संस्तम्भिनीं चिन्तयेत्।। शिरो मे पातु ॐ ह्रीं ऐं श्रीं क्लीं पातु ललाटकम्। सम्बोधन-पदं पातु नेत्रे श्रीबगलानने।। श्रुतौ मम रिपुं पातु नासिकां नाशयद्वयम्। पातु गण्डौ सदा मामैश्वर्याण्यन्तं तु मस्तकम्।। देहि द्वन्द्वं सदा जिह्वां पातु शीघ्रं वचो मम। कण्ठदेशं मनः पातु वाञ्छितं बाहुमूलकम्।। कार्यं साधयद्वन्द्वं तु करौ पातु सदा मम। मायायुक्ता तथा स्वाहा हृदयं पातु सर्वदा।। अष्टाधिक चत्वारिंश दण्डाढया बगलामुखी। रक्षां करोतु सर्वत्र गृहेऽरण्ये सदा मम।। ब्रह्मास्त्राख्यो मनुः पातु सर्वांगे सर्व सन्धिषु। मन्त्रराजः सदा रक्षां करोतु मम सर्वदा।। ॐ ह्रीं पातु नाभिदेशं कटिं मे बगलाऽवतु। मुखिवर्णद्वयं पातु लिंग मे मुष्क-युग्मकम्।। जानुनी सर्वदुष्टानां पातु मे वर्णपञ्चकम्। वाचं मुखं तथा पादं षड्वर्णाः परमेश्वरी।। जंघायुग्मे सदा पातु बगला रिपुमोहिनी। स्तम्भयेति पदं पृष्ठं पातु वर्णत्रयं मम।। जिह्वा वर्णद्वयं पातु गुल्फौ मे कीलयेति च। पादोर्ध्व सर्वदा पातु बुद्धिं पादतले मम।। विनाशय पदं पातु पादांगुल्योर्नखानि मे। ह्रीं बीजं सर्वदा पातु बुद्धिन्द्रियवचांसि मे।। सर्वांगं प्रणवः पातु स्वाहा रोमाणि मेऽवतु। ब्राह्मी पूर्वदले पातु चाग्नेय्यां विष्णुवल्लभा।। माहेशी दक्षिणे पातु चामुण्डा राक्षसेऽवतु। कौमारी पश्चिमे पातु वायव्ये चापराजिता।। वाराही चोत्तरे पातु नारसिंही शिवेऽवतु। ऊर्ध्वं पातु महालक्ष्मीः पाताले शारदाऽवतु।। इत्यष्टौ शक्तयः पान्तु सायुधाश्च सवाहनाः। राजद्वारे महादुर्गे पातु मां गणनायकः।। श्मशाने जलमध्ये च भैरवश्च सदाऽवतु। द्विभुजा रक्तवसनाः सर्वाभरणभूषिताः।। योगिन्यः सर्वदा पान्तु महारण्ये सदा मम। इति ते कथितं देवि कवचं परमाद् भुतम्।। 13
kaamya mantraप्रणतानां प्रसीद त्वं देवि विश्वार्तिहारिणि। त्रैलोक्यवासिनामीड्ये लोकानां वरदा भव॥