ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
अघोरास्त्र (दक्षिण मुखी शिव)

अघोरास्त्र (दक्षिण मुखी शिव) सिद्ध मंत्र

ॐ अघोरेभ्यः अथ घोरेभ्यो घोरघोरतरेभ्यश्च । सर्वतः शर्व सर्वेभ्यो नमस्ते रुद्ररूपेभ्यः ॥

मूलाधार में बैठे भय को जलाकर नाभि चक्र की अग्नि में भस्म कर देना 57। यह उच्च-आवृत्ति (High-frequency) वाला आभामंडल (Aura) बनाता है जो बुरी नज़र, ईर्ष्या, और तांत्रिक मारण प्रयोगों को जड़ से नष्ट कर दे

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारसिद्ध मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

मूलाधार में बैठे भय को जलाकर नाभि चक्र की अग्नि में भस्म कर देना 57। यह उच्च-आवृत्ति (High-frequency) वाला आभामंडल (Aura) बनाता है जो बुरी नज़र, ईर्ष्या, और तांत्रिक मारण प्रयोगों को जड़ से नष्ट कर देता है 57।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

मूलाधार में बैठे भय को जलाकर नाभि चक्र की अग्नि में भस्म कर देना 57

02

यह उच्च-आवृत्ति (High-frequency) वाला आभामंडल (Aura) बनाता है जो बुरी नज़र, ईर्ष्या, और तांत्रिक मारण प्रयोगों को जड़ से नष्ट कर देता है

जाप विधि

यह मंत्र शिव के दक्षिण मुख (अग्नि तत्त्व) को जाग्रत करता है 57। इसमें अत्यंत उग्र ऊर्जा (Ushna) उत्पन्न होती है, इसलिए कठोर अनुशासन अनिवार्य है 57। 'जुं' बीज के साथ सम्पुटित कर इसका प्रयोग किया जाता है 57।

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