अष्टसिद्धि योग (महिमा सिद्धि) सिद्ध मंत्र
ॐ मं महिमायै नमः स्वाहा ।
भौतिक शरीर को असीमित, विशाल और ब्रह्मांडीय स्तर (Gigantic/Celestial scale) तक विस्तारित करने की शक्ति 54। यह चेतना की संकीर्णता को तोड़कर साधक को 'विराट' सोचने और सीमाओं से परे जाने की क्षमता प्रदान क
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यह मंत्र क्यों?
भौतिक शरीर को असीमित, विशाल और ब्रह्मांडीय स्तर (Gigantic/Celestial scale) तक विस्तारित करने की शक्ति 54। यह चेतना की संकीर्णता को तोड़कर साधक को 'विराट' सोचने और सीमाओं से परे जाने की क्षमता प्रदान करता है 50।
इस मंत्र से क्या होगा?
भौतिक शरीर को असीमित, विशाल और ब्रह्मांडीय स्तर (Gigantic/Celestial scale) तक विस्तारित करने की शक्ति 54
यह चेतना की संकीर्णता को तोड़कर साधक को 'विराट' सोचने और सीमाओं से परे जाने की क्षमता प्रदान करता है
जाप विधि
दक्षिण-पश्चिम (South-West) दिशा की ओर मुख करके इस बीज मंत्र का उच्चारण और ध्यान किया जाता है 53।
विशेष टिप्पणियाँ
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नीलांचल निवासाय नित्याय परमात्मने। बलभद्र सुभद्राभ्यां जगन्नाथाय ते नमः
sabar mantraधन जैसे चुंबक खींचे लोह गोरख की आज्ञा टले नहीं मिटे साधक का मोह कीड़ा जागे पिंगला जागे सुष्मना का खुले द्वार जब तीनों नाड़ी जागे धन आवे बारंबार जैसे गंगा बहे अविरल जैसे सूरज देत उजास वैसे मेरे घर में लक्ष्मी करे सदा ही वास रुका धन चले बंद धन खुले आवे चहुं ओर से धन गोरख का शब्द सांचा रे सांचा रे गुरु का मन काल का भी काल है गोरख तीनों लोक बसेरा जो गोरख का नाम ले साधक उसका होए उजेरा उठ उठ लक्ष्मी आव बैठ मेरे द्वार गोरख की आज्ञा लेकर आव कर मेरा उद्धार शब्द सांचा पिंड कांचा सांची गुरु की बानी हुकुम गोरखनाथ का चले यही नाथ की निशानी 5
ugra mantraॐ पक्षिराजाय विद्महे शरभेश्वराय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्
naam mantraभास्कर
navgrah mantraॐ ह्सौः श्रीं आं ग्रहाधिराजाय आदित्याय स्वाहा॥
jap mantraॐ ह्रीं ह्रीं वं वं ऐं ऐं मृतसंजीवनि विधे मृतमुत्थापयोत्थापय क्रीं ह्रीं ह्रीं वं स्वाहा