भगवान कार्तिकेय (स्कन्द) जप मंत्र
ॐ कार्तिकेयाय विद्महे वल्लीनाथाय धीमहि तन्नो स्कन्दः प्रचोदयात्
मनोकामनाओं की त्वरित पूर्ति, ब्रह्मचर्य की रक्षा, नेतृत्व क्षमता में वृद्धि और विजय की प्राप्ति। 58
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
मनोकामनाओं की त्वरित पूर्ति, ब्रह्मचर्य की रक्षा, नेतृत्व क्षमता में वृद्धि और विजय की प्राप्ति। 58
इस मंत्र से क्या होगा?
मनोकामनाओं की त्वरित पूर्ति, ब्रह्मचर्य की रक्षा, नेतृत्व क्षमता में वृद्धि और विजय की प्राप्ति
जाप विधि
१०८ बार, रुद्राक्ष की माला, विशेष रूप से षष्ठी तिथि या मंगलवार के दिन। ब्रह्मचर्य अनिवार्य। 58
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ब्रिं
kavach mantraपातु श्रवणे वासरेश्वर घ्राणं धर्म पातु पदन वेदवाहन जीवा मानद पातु कंठ में सुरवंदित स्कंद प्रभाकर पातु वक्ष पातु जन प्रिय पातु पाद द्वादशात्मा सर्व सर्वांग सकलेश्वर यक्ष गन्धर्व राक्षसाः ब्रह्मराक्षस वेतालाः क्षमा दूरा देव पलायंते तस्य संकीर्तना अज्ञात कवच दिव्य यो जपे सूर्य मंत्रम् सिद्धि जायते तस्य कल्पकोटि शतैरपि। इति श्री ब्रह्मयामले त्रैलोक्य मंगलम नाम सूर्य कवचम संपूर्णम। 15
stotra mantraरामो राजमणि: सदा विजयते रामं रमेशं भजे । रामेणाभिहता निशाचरचमू रामाय तस्मै नम: । रामान्नास्ति परायणं परतरं रामस्य दासोऽस्म्यहम् । रामे चित्तलय: सदा भवतु मे भो राम मामुद्धर ॥ 16
mool mantraॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्यधिपतये धनधान्यसमृद्धिम मे देहि दापय स्वाहा
naam mantraविघ्नहर्ता
kaamya mantraॐ नमो भगवते वासुदेवाय धनं मे देहि दास्योः स्वाहा।