ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
सविता देव (गायत्री)

सविता देव (गायत्री) जप मंत्र

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्

बुद्धिमत्ता (मेधा) का विकास, चेतना का दिव्यकरण, ज्ञान प्राप्ति और अज्ञान रूपी अंधकार का नाश। 2

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारजप मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

बुद्धिमत्ता (मेधा) का विकास, चेतना का दिव्यकरण, ज्ञान प्राप्ति और अज्ञान रूपी अंधकार का नाश। 2

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

बुद्धिमत्ता (मेधा) का विकास, चेतना का दिव्यकरण, ज्ञान प्राप्ति और अज्ञान रूपी अंधकार का नाश

जाप विधि

त्रिकाल संध्या (प्रातः, दोपहर, सायं) में १०८ बार, रुद्राक्ष या तुलसी की माला। 2

विशेष टिप्पणियाँ

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नासां वैवस्वत: पातु मुखं मे भास्कर: सदा । नाभिं गृहपति: पातु मन्द: पातु कटिं तथा । पदौ मन्दगति: पातु सर्वांग पातु पिप्पल: । आंगो पांगानी सर्वानी रक्षे में सूर्य नंदन इत्तेत कवच देव पठे सूर्य सुतस्य यह नतस्य जायते पीडा प्रीतो भवति सूर्य जह व्यय जन्म द्वितीय मृत्यु स्थान गतो पिवा कलस्थो गतो वापी सुप्रीतु सदाशनी अष्टमस्थे सूर्यसुते व्यये जन्म द्वितीयगे। कवचं पठते नित्यं न पीडा जायते क्वचित्। इत्य तत कवचम दिव्यम सौरे निर्मित पुरा जन्म लग्न स्थिता दोषा सर्वान नाश्यते प्रभु इति शनि कवच संपूर्णं ॥ 20

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राम कुण्डली, ब्रह्मचाक । तेतीस कोटि देवा देवा अमुक की बेड़ियां । अमुकेर अंकेर बाण काटम्। शर काटम् । संधान काटम् । कुज्ञान काटम् । कारवणे काटे । राजा रामचन्द्रेर आज्ञा । राजा रामचन्द्ररे ऐई झण्डी अमुकेर अंगे शीघ्र लागूगे 25

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