भगवती नारायणी काम्य मंत्र
प्रणतानां प्रसीद त्वं देवि विश्वार्तिहारिणि। त्रैलोक्यवासिनामीड्ये लोकानां वरदा भव॥
जीवन में अकारण छाई उदासी का नाश, अपार प्रसन्नता एवं आत्म-संतुष्टि की प्राप्ति 28।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
जीवन में अकारण छाई उदासी का नाश, अपार प्रसन्नता एवं आत्म-संतुष्टि की प्राप्ति 28।
इस मंत्र से क्या होगा?
जीवन में अकारण छाई उदासी का नाश, अपार प्रसन्नता एवं आत्म-संतुष्टि की प्राप्ति
जाप विधि
नित्य पूजा के समय स्तुति स्वरूप जप 28।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ध्येयः सदा सवितृमण्डलमध्यवर्ती नारायणः सरसिजासनसन्निविष्टः। केयूरवान्मकरकुण्डलवान् किरीटी हारी हिरण्मयवपुर्धृतशङ्खचक्रः॥
vaidik mantraॐ हस्ताभ्यां दशशाखाभ्यां जिह्वा वाचः पुरोगवी । अनामयित्नुभ्यां हस्ताभ्यां ताभ्यां त्वाभि मृशामसि ॥
stotra mantraसर्वः शर्वः शिवः स्थाणुर्भूतादिर्निधिरव्ययः। सम्भवो भावनो भर्ता प्रभवः प्रभुरीश्वरः ॥ 12
navgrah mantraॐ काकध्वजाय विद्महे खड्गहस्ताय धीमहि तन्नो मन्दः प्रचोदयात्।
bhakti mantraॐ श्री गणपतये नमः
shanti mantraॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्माऽमृतं गमय ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥