भगवती नारायणी काम्य मंत्र
प्रणतानां प्रसीद त्वं देवि विश्वार्तिहारिणि। त्रैलोक्यवासिनामीड्ये लोकानां वरदा भव॥
जीवन में अकारण छाई उदासी का नाश, अपार प्रसन्नता एवं आत्म-संतुष्टि की प्राप्ति 28।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
जीवन में अकारण छाई उदासी का नाश, अपार प्रसन्नता एवं आत्म-संतुष्टि की प्राप्ति 28।
इस मंत्र से क्या होगा?
जीवन में अकारण छाई उदासी का नाश, अपार प्रसन्नता एवं आत्म-संतुष्टि की प्राप्ति
जाप विधि
नित्य पूजा के समय स्तुति स्वरूप जप 28।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते । शंख चक्र गदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ 29
ugra mantraॐ लां लाकिन्यै नमः
sabar mantraभैरव शिव का चेला जहां जहां-जहां जाऊं नगर डगर लगे वहां फिर मेला शिव का धुना गोरख तापे काल कंटक थर थर कांपे मेरी रक्षा करें नवनाथ रामदूत हनुमंत रिद्धि सिद्धि आंगन विराजे माई अन्नपूर्णा सुखवंत शब्द सांचा पिंड काचा चलो मंत्र ईश्वर वाचा ओम गुरु जी गोरख जति मच्छिंद्र का चेला शिव के रूप में दिखे अलबेला कानों कुंडल गले में नादी हाथ त्रिशूल नाथ है आदि अलख पुरुष को करूं आदेश जन्म जन्म के काटो कलेश भगवा वेश हाथ में खप्पर भैरव शिव का चेला जहां जहां जाऊं नगर डगर लगे वहां फिर मेला शिव का धुना गोरख तापे काल कंटक थर थर कांपे मेरी रक्षा करें नवनाथ रामदूत हनुमंत रिद्धि सिद्धि आंगन विराजे माई अन्नपूर्णा सुखवंत शब्द सांचा पिंड कांचा चलो मंत्र ईश्वर वाचा 2
naam mantraकिशोरी जी
navgrah mantraॐ क्रीं क्रीं हूं हूं टं टङ्कधारिणे राहवे रं ह्रीं श्रीं भैं स्वाहा॥
jap mantraॐ नमो नारायणाय