भगवती नारायणी काम्य मंत्र
प्रणतानां प्रसीद त्वं देवि विश्वार्तिहारिणि। त्रैलोक्यवासिनामीड्ये लोकानां वरदा भव॥
जीवन में अकारण छाई उदासी का नाश, अपार प्रसन्नता एवं आत्म-संतुष्टि की प्राप्ति 28।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
जीवन में अकारण छाई उदासी का नाश, अपार प्रसन्नता एवं आत्म-संतुष्टि की प्राप्ति 28।
इस मंत्र से क्या होगा?
जीवन में अकारण छाई उदासी का नाश, अपार प्रसन्नता एवं आत्म-संतुष्टि की प्राप्ति
जाप विधि
नित्य पूजा के समय स्तुति स्वरूप जप 28।
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