गुरु गोरखनाथ भूत-प्रेत बाधा निवारण शाबर मंत्र
गुरु गोरखनाथ की दुहाई। भूत-प्रेत भागे, मारो घुड़ाई। शब्द सांचा, पीर मेरा पावना। गुरु गोरखनाथ की आग्या 13
इस मंत्र का विशुद्ध प्रयोजन मानव शरीर और मस्तिष्क पर बलपूर्वक अधिकार जमा चुकी अवांछित सूक्ष्म शक्तियों, भूत-प्रेत, पिशाच, और घोर नकारात्मक ऊर्जाओं का समूल निष्कासन करना है 13। शाबर परंपरा में गोरखनाथ
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
इस मंत्र का विशुद्ध प्रयोजन मानव शरीर और मस्तिष्क पर बलपूर्वक अधिकार जमा चुकी अवांछित सूक्ष्म शक्तियों, भूत-प्रेत, पिशाच, और घोर नकारात्मक ऊर्जाओं का समूल निष्कासन करना है 13। शाबर परंपरा में गोरखनाथ की 'दुहाई' और 'आज्ञा' का अर्थ है कि ब्रह्मांड की कोई भी तामसिक या पैशाचिक शक्ति इस सर्वोच्च आदेश की अवहेलना नहीं कर सकती। 'मारो घुड़ाई' का तात्पर्य उस नकारात्मक शक्ति के सूक्ष्म शरीर पर प्राणघातक प्रहार करने से है, जिससे वह भयंकर पीड़ा और भय से ग्रस्त होकर पीड़ित के शरीर को तत्काल मुक्त कर देती है 13। यह अतीन्द्रिय व्याधियों को समाप्त कर प्राणी को पुनः स्वस्थ और चैतन्य बनाने का एक अमोघ और त्वरित अस्त्र है।
इस मंत्र से क्या होगा?
इस मंत्र का विशुद्ध प्रयोजन मानव शरीर और मस्तिष्क पर बलपूर्वक अधिकार जमा चुकी अवांछित सूक्ष्म शक्तियों, भूत-प्रेत, पिशाच, और घोर नकारात्मक ऊर्जाओं का समूल निष्कासन करना है 13
शाबर परंपरा में गोरखनाथ की 'दुहाई' और 'आज्ञा' का अर्थ है कि ब्रह्मांड की कोई भी तामसिक या पैशाचिक शक्ति इस सर्वोच्च आदेश की अवहेलना नहीं कर सकती
'मारो घुड़ाई' का तात्पर्य उस नकारात्मक शक्ति के सूक्ष्म शरीर पर प्राणघातक प्रहार करने से है, जिससे वह भयंकर पीड़ा और भय से ग्रस्त होकर पीड़ित के शरीर को तत्काल मुक्त कर देती है 13
यह अतीन्द्रिय व्याधियों को समाप्त कर प्राणी को पुनः स्वस्थ और चैतन्य बनाने का एक अमोघ और त्वरित अस्त्र है
जाप विधि
इस अत्यंत प्रभावी शाबर मंत्र की सिद्धि और प्रयोग के लिए विशेष रूप से कृष्ण पक्ष की अमावस्या अथवा शनिवार की घोर रात्रि का विधान शास्त्रों और लोक परंपराओं में वर्णित है 13। साधक को पूर्ण शारीरिक एवं मानसिक पवित्रता के साथ एकांत कक्ष में पश्चिम या दक्षिण (यम की दिशा) की ओर मुख करके बैठना चाहिए। सर्वप्रथम गुरु गोरखनाथ का मानसिक ध्यान करते हुए उन्हें धूप और सरसों के तेल का दीप अर्पित किया जाता है। तदोपरांत, रुद्राक्ष माला से इस मंत्र का 108 बार (एक माला) स्पष्ट और वाचनिक जप किया जाता है 13। जब मंत्र सिद्ध हो जाए (अर्थात ऊर्जा जाग्रत हो जाए), तो पीड़ित व्यक्ति के शरीर से भूत-प्रेत की भयंकर बाधा हटाने हेतु इसी मंत्र का 108 बार निरंतर जप करते हुए शुद्ध जल को अभिमंत्रित किया जाता है। वह अभिमंत्रित जल रोगी के ऊपर तीन बार छिड़का जाता है अथवा उसे औषधि के रूप में पीने के लिए दिया जाता है। अत्यंत उग्र स्थिति में, जहाँ शक्ति शरीर छोड़ने को तैयार न हो, वहाँ यह मंत्र सीधे रोगी के कान में भी पढ़ा (फूंका) जाता है 13।
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