भगवान नृसिंह काम्य मंत्र
ॐ पातु शिरसि नित्यं पातु ह्रीं कण्ठदेशके। नृसिंह पातु हृदये आपदुद्धारणाय च॥
शत्रु बाधा का तीव्र निवारण, अकाल मृत्यु का भय दूर करना और घोर जीवन-संकटों से रक्षा 25।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
शत्रु बाधा का तीव्र निवारण, अकाल मृत्यु का भय दूर करना और घोर जीवन-संकटों से रक्षा 25।
इस मंत्र से क्या होगा?
शत्रु बाधा का तीव्र निवारण, अकाल मृत्यु का भय दूर करना और घोर जीवन-संकटों से रक्षा
जाप विधि
उग्र और संकट की स्थिति में सात्विकता और दृढ़ संकल्प के साथ नित्य जप करें 25।
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ॐ ऐं क्लीं सौः
kavach mantraनासां वैवस्वत: पातु मुखं मे भास्कर: सदा । नाभिं गृहपति: पातु मन्द: पातु कटिं तथा । पदौ मन्दगति: पातु सर्वांग पातु पिप्पल: । आंगो पांगानी सर्वानी रक्षे में सूर्य नंदन इत्तेत कवच देव पठे सूर्य सुतस्य यह नतस्य जायते पीडा प्रीतो भवति सूर्य जह व्यय जन्म द्वितीय मृत्यु स्थान गतो पिवा कलस्थो गतो वापी सुप्रीतु सदाशनी अष्टमस्थे सूर्यसुते व्यये जन्म द्वितीयगे। कवचं पठते नित्यं न पीडा जायते क्वचित्। इत्य तत कवचम दिव्यम सौरे निर्मित पुरा जन्म लग्न स्थिता दोषा सर्वान नाश्यते प्रभु इति शनि कवच संपूर्णं ॥ 20
beej mantraडं, ढं, णं, तं, थं, दं, धं, नं, पं, फं
ugra mantraॐ ह्रीं ह्रीं हूं हूं क्रीं क्रीं क्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा
dhyan mantraध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचंद्रावतंसं रत्नाकल्पोज्ज्वलांगं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्। पद्मासीनं समंतात्स्थितममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानं विश्वाद्यं विश्वबीजं निखिलभयहरं पंचवक्त्रं त्रिनेत्रम्॥
stotra mantraविज्ञानवृद्धिं हृदये कुरु श्रीः सौभाग्यवृद्धिं कुरु मे गृहे श्रीः । दयासुवृद्धिं कुरुतां मयि श्रीः सुवर्णवृद्धिं कुरु मे गृहे श्रीः ॥ 27