केतु नवग्रह मंत्र
ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः॥
केतु की मारक महादशा या अंतर्दशा में होने वाले आकस्मिक पतन, शल्य चिकित्सा (Surgery) या रक्तस्राव वाली दुर्घटनाओं को रोकने, तथा मोक्ष व कुंडलिनी शक्ति के आध्यात्मिक जागरण हेतु इस तांत्रिक बीज मंत्र का उ
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
केतु की मारक महादशा या अंतर्दशा में होने वाले आकस्मिक पतन, शल्य चिकित्सा (Surgery) या रक्तस्राव वाली दुर्घटनाओं को रोकने, तथा मोक्ष व कुंडलिनी शक्ति के आध्यात्मिक जागरण हेतु इस तांत्रिक बीज मंत्र का उपयोग होता है। 4
इस मंत्र से क्या होगा?
केतु की मारक महादशा या अंतर्दशा में होने वाले आकस्मिक पतन, शल्य चिकित्सा (Surgery) या रक्तस्राव वाली दुर्घटनाओं को रोकने, तथा मोक्ष व कुंडलिनी शक्ति के आध्यात्मिक जागरण हेतु इस तांत्रिक बीज मंत्र का उपयोग होता है
जाप विधि
मंगलवार अथवा गुरुवार की रात्रि में सत्रह हजार बार चालीस दिनों की अवधि में जप पूर्ण करें। गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ साथ में करना अत्यंत लाभकारी माना गया है। 1
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ॐ नमो नारायणाय
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vaidik mantraॐ समुद्रादर्णवादधि संवत्सरो अजायत । अहोरात्राणि विदधद् विश्वस्य मिषतो वशी ॥
kavach mantraॐ भूर्भुव: स्व: प्रांचामा पातु भूतेशः अग्ने पातु शंकर दक्षिणे पातुमा रुद्रो नैऋत्य स्थानु रेवच पश्चिमे खंड परशु वायव्या चंद्रशेखर उत्तरे गिरीशः पातु चैशान्य ईश्वर स्वयं उर्ध्वे मुंड सदा पातु चाध्य मृत्युंजय स्वयं जले स्थले चांदरीक्षे स्वप्ने जागरने सदा पिना कितुमा प्रीत्या भक्तम वैभक्त वत्सल य: सदा धारयेन्मर्त्य: शैवं कवचमुत्तमम् । न तस्य जायते क्वापि भयं शंभोरनुग्रहात् ॥ 30॥ इति अमोघ शिव कवच सम्पूर्ण ॥ 4
beej mantraहूँ