ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
विपरीत प्रत्यंगिरा (शत्रुनाशक गुरु मंत्र)

विपरीत प्रत्यंगिरा (शत्रुनाशक गुरु मंत्र) उग्र मंत्र

ॐ हूं स्फारय-स्फारय, मारय-मारय, शत्रु-वर्गान् नाशय-नाशय स्वाहा

सर्व-शत्रु-क्षय (ज्ञात और अज्ञात सभी प्रकार के शत्रुओं का तीव्र और निश्चित नाश) 10।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारउग्र मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

सर्व-शत्रु-क्षय (ज्ञात और अज्ञात सभी प्रकार के शत्रुओं का तीव्र और निश्चित नाश) 10।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

सर्व-शत्रु-क्षय (ज्ञात और अज्ञात सभी प्रकार के शत्रुओं का तीव्र और निश्चित नाश)

जाप विधि

इस गुरु मंत्र का 100 बार जप कर अभिमंत्रित सफेद सरसों (श्वेत सर्षप) को दसों दिशाओं में फेंका जाता है 10।

विशेष टिप्पणियाँ

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