विपरीत प्रत्यंगिरा (शत्रुनाशक गुरु मंत्र) उग्र मंत्र
ॐ हूं स्फारय-स्फारय, मारय-मारय, शत्रु-वर्गान् नाशय-नाशय स्वाहा
सर्व-शत्रु-क्षय (ज्ञात और अज्ञात सभी प्रकार के शत्रुओं का तीव्र और निश्चित नाश) 10।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
सर्व-शत्रु-क्षय (ज्ञात और अज्ञात सभी प्रकार के शत्रुओं का तीव्र और निश्चित नाश) 10।
इस मंत्र से क्या होगा?
सर्व-शत्रु-क्षय (ज्ञात और अज्ञात सभी प्रकार के शत्रुओं का तीव्र और निश्चित नाश)
जाप विधि
इस गुरु मंत्र का 100 बार जप कर अभिमंत्रित सफेद सरसों (श्वेत सर्षप) को दसों दिशाओं में फेंका जाता है 10।
विशेष टिप्पणियाँ
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ॐ ह्रीं क्रूं क्रूररूपिणे केतवे ऐं सौः स्वाहा॥
jap mantraॐ नमो नृसिंहाय हिरण्यकश्यप-वक्ष-स्थल-विदारणाय त्रिभुवनव्यापकाय भूत, प्रेत, पिशाच, डाकिनी कुलोन्मूल नाशाय स्तम्भोद्भवाय समस्तदोषान् हर-हर विसर-विसर पच-पच-हन-हन-कम्पय-कम्पय मथ-मथ ह्रीं ह्रीं फट् फट् एह्येहि रुद्र आज्ञापयति स्वाहा
naam mantraमयंक
sabar mantraऊँ नमो आदेश गुरु गोरखनाथ की। शत्रु सवा लाख, एक मरे तो सब सिधाय 13
stotra mantraऊं नमो भगवते तस्मै यत एतच्चिदात्मकम । पुरुषायादिबीजाय परेशायाभिधीमहि ॥ 4
siddh mantraॐ अघोरेभ्यः अथ घोरेभ्यो घोरघोरतरेभ्यश्च । सर्वतः शर्व सर्वेभ्यो नमस्ते रुद्ररूपेभ्यः ॥