त्रिपुर भैरव उग्र मंत्र
ह्रीं श्रीं हंसः ह्सौं स्वाहा
तांत्रिक षट्कर्म की पूर्णता तथा उग्र भैरव की सर्वोच्च कृपा और आध्यात्मिक शक्ति की प्राप्ति 12।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
तांत्रिक षट्कर्म की पूर्णता तथा उग्र भैरव की सर्वोच्च कृपा और आध्यात्मिक शक्ति की प्राप्ति 12।
इस मंत्र से क्या होगा?
तांत्रिक षट्कर्म की पूर्णता तथा उग्र भैरव की सर्वोच्च कृपा और आध्यात्मिक शक्ति की प्राप्ति
जाप विधि
भैरव तंत्र के अंतर्गत गुरु-शिष्य परंपरा से प्राप्त गुप्त विधि द्वारा षडंग न्यास के साथ जप 12।
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ॐ उलटत नरसिंह पलटत काया एहिले नरसिंह तोहे बुलाया जो मोर नाम करत सो मरत परत भैरव चक्कर में उल्टी वेद उसी को लागे कार दुहाई बड़े वीर नरसिंह की दुहाई कामरो कामाख्या देवी की दुहाई अष्टभुज देवी कालिका की दुहाई शिव सतगुरु के बंदे पायो
vaidik mantraॐ अग्निर्वृत्राणि जङ्घनत् द्रविणस्युर्विपन्यया । समिद्धः शुक्र आहुतः ॥
gyan mantraॐ श्री हयग्रीवाय नमः ॥
mool mantraॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने प्रणतः क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः
stotra mantraयः स्वात्मनीदं निजमाययार्पितं क्वचिद्विभातं क्व च तत्तिरोहितम । अविद्धदृक साक्ष्युभयं तदीक्षते स आत्म मूलोsवत् मां परात्परः ॥ 4
tantrik mantraॐ हूं गं ग्लौं हरिद्रा गणपतये वर वरद सर्व जन हृदयं स्तम्भय स्तम्भय स्वाहा