धूमावती (रोग व ज्वर नाशक उग्र रूप) उग्र मंत्र
ॐ धूं धूं धूं धूमावती माम रक्ष रक्ष शीघ्रम शीघ्रमाच्छा गच्छ क्षिप्रमेव आरोग्यम कुरु कुरु हुम फट धूम धूम धूमावती स्वाहा
प्राणघातक विषम ज्वर, भूत-प्रेत दोष, ताप ज्वर व शरीर पर किए गए समस्त कृत्रिम तांत्रिक दोषों का तत्काल निवारण 16।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
प्राणघातक विषम ज्वर, भूत-प्रेत दोष, ताप ज्वर व शरीर पर किए गए समस्त कृत्रिम तांत्रिक दोषों का तत्काल निवारण 16।
इस मंत्र से क्या होगा?
प्राणघातक विषम ज्वर, भूत-प्रेत दोष, ताप ज्वर व शरीर पर किए गए समस्त कृत्रिम तांत्रिक दोषों का तत्काल निवारण
जाप विधि
करन्यास व हृदयादि न्यास करने के पश्चात्, जल को इस उग्र मंत्र से अभिमंत्रित कर रोगी या तंत्र पीड़ित व्यक्ति पर छिड़कना चाहिए 16।
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ताः सर्वाःप्रशमं यान्ति व्यासोब्रूते न संशयः ॥ 35
siddh mantraॐ श्रीं ह्रीं क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजन वल्लभाय पराय परमपुरुषाय परात्मने परकर्म मन्त्र यन्त्र तन्त्र औषध विष आभिचार अस्त्र शस्त्र संहर संहर मृत्युर् मोचय मोचय । ॐ नमो भगवते महा सुदर्शनाय । ॐ प्रीं रीं रुँ दीप्त्रेय ज्वलापरीताय सर्वदिग्क्षोभनकाराय कारय हुं फट् परब्रह्मणे परमज्योतिषे स्वाहा ।
bhakti mantraश्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे, हे नाथ नारायण वासुदेव
mool mantraॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः (सामान्य मूल: ॐ शुक्राय नमः)
kaamya mantraॐ ह्रीं योगिनि योगिनि योगेश्वरि योग भयङ्करि सकल स्थावर जङ्गमस्य मुख हृदयं मम वशं आकर्षय आकर्षय नमः।
beej mantraग्रौं