धूमावती (रोग व ज्वर नाशक उग्र रूप) उग्र मंत्र
ॐ धूं धूं धूं धूमावती माम रक्ष रक्ष शीघ्रम शीघ्रमाच्छा गच्छ क्षिप्रमेव आरोग्यम कुरु कुरु हुम फट धूम धूम धूमावती स्वाहा
प्राणघातक विषम ज्वर, भूत-प्रेत दोष, ताप ज्वर व शरीर पर किए गए समस्त कृत्रिम तांत्रिक दोषों का तत्काल निवारण 16।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
प्राणघातक विषम ज्वर, भूत-प्रेत दोष, ताप ज्वर व शरीर पर किए गए समस्त कृत्रिम तांत्रिक दोषों का तत्काल निवारण 16।
इस मंत्र से क्या होगा?
प्राणघातक विषम ज्वर, भूत-प्रेत दोष, ताप ज्वर व शरीर पर किए गए समस्त कृत्रिम तांत्रिक दोषों का तत्काल निवारण
जाप विधि
करन्यास व हृदयादि न्यास करने के पश्चात्, जल को इस उग्र मंत्र से अभिमंत्रित कर रोगी या तंत्र पीड़ित व्यक्ति पर छिड़कना चाहिए 16।
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