धूमावती (रोग व ज्वर नाशक उग्र रूप) उग्र मंत्र
ॐ धूं धूं धूं धूमावती माम रक्ष रक्ष शीघ्रम शीघ्रमाच्छा गच्छ क्षिप्रमेव आरोग्यम कुरु कुरु हुम फट धूम धूम धूमावती स्वाहा
प्राणघातक विषम ज्वर, भूत-प्रेत दोष, ताप ज्वर व शरीर पर किए गए समस्त कृत्रिम तांत्रिक दोषों का तत्काल निवारण 16।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
प्राणघातक विषम ज्वर, भूत-प्रेत दोष, ताप ज्वर व शरीर पर किए गए समस्त कृत्रिम तांत्रिक दोषों का तत्काल निवारण 16।
इस मंत्र से क्या होगा?
प्राणघातक विषम ज्वर, भूत-प्रेत दोष, ताप ज्वर व शरीर पर किए गए समस्त कृत्रिम तांत्रिक दोषों का तत्काल निवारण
जाप विधि
करन्यास व हृदयादि न्यास करने के पश्चात्, जल को इस उग्र मंत्र से अभिमंत्रित कर रोगी या तंत्र पीड़ित व्यक्ति पर छिड़कना चाहिए 16।
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ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
kavach mantraऊरू रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृत्। जानुनी सेतुकृत् पातु जङ्घे दशमुखान्तकः। पादौ विभीषणश्रीदः पातु रामोऽखिलं वपुः। एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत्। स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत्। पातालभूतलव्योम- चारिणश्छद्मचारिणः। न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः। रामेति रामभद्रेति रामचन्द्रेति वा स्मरन्। नरो न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति। जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम्। यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः। वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत्। अव्याहताज्ञः सर्वत्र लभते जयमङ्गलम्। 34
beej mantraद्रां
dhyan mantraअहं ब्रह्मास्मि
stotra mantraअजः सर्वेश्वरः सिद्धः सिद्धिः सर्वादिरच्युतः। वृषाकपिरमेयात्मा सर्वयोगविनिःसृतः॥ 12
shanti mantraॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥