मंगल नवग्रह मंत्र
धरणीगर्भ सम्भूतं विद्युत्कांति समप्रभम्। कुमारं शक्तिहस्तं तं मंगलं प्रणमाम्यहम्॥
क्रूर मंगल को शांत करने, वैवाहिक जीवन की बाधाओं (मांगलिक दोष जनित कलह) को दूर करने, क्रोधावेश पर नियंत्रण और शक्ति व अचल संपत्ति की प्राप्ति हेतु महर्षि व्यास रचित यह मंत्र सिद्ध है। 13
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
क्रूर मंगल को शांत करने, वैवाहिक जीवन की बाधाओं (मांगलिक दोष जनित कलह) को दूर करने, क्रोधावेश पर नियंत्रण और शक्ति व अचल संपत्ति की प्राप्ति हेतु महर्षि व्यास रचित यह मंत्र सिद्ध है। 13
इस मंत्र से क्या होगा?
क्रूर मंगल को शांत करने, वैवाहिक जीवन की बाधाओं (मांगलिक दोष जनित कलह) को दूर करने, क्रोधावेश पर नियंत्रण और शक्ति व अचल संपत्ति की प्राप्ति हेतु महर्षि व्यास रचित यह मंत्र सिद्ध है
जाप विधि
नित्य मंगलवार को भगवान शिव, हनुमान जी या कार्तिकेय जी की पूजा के उपरांत एक सौ आठ बार इस श्लोक का पाठ करें। 12
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुर्गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुरेव परंब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः॥
naam mantraइंद्र
ugra mantraॐ ह्रीं श्रीं शर्वाय नमः
sabar mantraक्रिम कामाख्या माई निज भैरव के संग आई देवे मनोवांछित सिद्धि पूरे सब कामना लेवे अडहुल का फूल सब स्त्री तोरा रूप मनसा पूरो माई तो शंकर की दुहाई क्रिंग क्रिंग क्रीम 18
bhakti mantraराम बोलो राम बोलो बोलो बोलो राम
stotra mantraयोगो योगविदां नेता प्रधानपुरुषेश्वरः। नारसिंहवपुः श्रीमान् केशवः पुरुषोत्तमः ॥ 12