माँ दुर्गा (नवार्ण मूल मंत्र) मूल मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
समस्त प्रकार की सांसारिक व आध्यात्मिक बाधाओं का नाश, शक्ति और साहस की असीम प्राप्ति, नवग्रहों की शांति तथा शत्रुओं एवं नकारात्मक शक्तियों का पूर्ण दमन 34।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
समस्त प्रकार की सांसारिक व आध्यात्मिक बाधाओं का नाश, शक्ति और साहस की असीम प्राप्ति, नवग्रहों की शांति तथा शत्रुओं एवं नकारात्मक शक्तियों का पूर्ण दमन 34।
इस मंत्र से क्या होगा?
समस्त प्रकार की सांसारिक व आध्यात्मिक बाधाओं का नाश, शक्ति और साहस की असीम प्राप्ति, नवग्रहों की शांति तथा शत्रुओं एवं नकारात्मक शक्तियों का पूर्ण दमन
जाप विधि
प्रातः व सायं काल लाल ऊनी आसन पर बैठकर, लाल चंदन या रुद्राक्ष की माला से प्रतिदिन १०८ बार जप करें। जप करते समय देवी के उग्र एवं सौम्य दोनों स्वरूपों का ध्यान किया जाता है 34।
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sabar mantraकाल भैरव का जो नाम ले नर नारी उसके लिए मूठ कभी ना पड़े भारी जय जय काल भैरव देव मूठ चली हवा बनकर काल भैरव चले ढाल बनकर अष्ट हाथ भैरव जी के फैले काट दी जड़ मूठ की चढ़ा दी आकाश नीचे काटी ऊपर काटी काट दी पाताल में 11