ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
शुक्र

शुक्र मूल मंत्र

ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः (सामान्य मूल: ॐ शुक्राय नमः)

गुप्त रोगों से मुक्ति, शुक्र ग्रह के दोषों का परिहार, भौतिक ऐश्वर्य, वैवाहिक सुख, कला-सौंदर्य में निखार एवं दांपत्य जीवन में माधुर्य 47।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारमूल मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

गुप्त रोगों से मुक्ति, शुक्र ग्रह के दोषों का परिहार, भौतिक ऐश्वर्य, वैवाहिक सुख, कला-सौंदर्य में निखार एवं दांपत्य जीवन में माधुर्य 47।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

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गुप्त रोगों से मुक्ति, शुक्र ग्रह के दोषों का परिहार, भौतिक ऐश्वर्य, वैवाहिक सुख, कला-सौंदर्य में निखार एवं दांपत्य जीवन में माधुर्य

जाप विधि

शुक्रवार को प्रातः या सायं श्वेत आसन पर बैठकर स्फटिक की माला से पूर्व या दक्षिण-पूर्व दिशा की ओर मुख करके जप करें। अनुष्ठान में ४० दिनों के भीतर १६,००० मंत्र जपे जाते हैं 47।

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