शुक्र मूल मंत्र
ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः (सामान्य मूल: ॐ शुक्राय नमः)
गुप्त रोगों से मुक्ति, शुक्र ग्रह के दोषों का परिहार, भौतिक ऐश्वर्य, वैवाहिक सुख, कला-सौंदर्य में निखार एवं दांपत्य जीवन में माधुर्य 47।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
गुप्त रोगों से मुक्ति, शुक्र ग्रह के दोषों का परिहार, भौतिक ऐश्वर्य, वैवाहिक सुख, कला-सौंदर्य में निखार एवं दांपत्य जीवन में माधुर्य 47।
इस मंत्र से क्या होगा?
गुप्त रोगों से मुक्ति, शुक्र ग्रह के दोषों का परिहार, भौतिक ऐश्वर्य, वैवाहिक सुख, कला-सौंदर्य में निखार एवं दांपत्य जीवन में माधुर्य
जाप विधि
शुक्रवार को प्रातः या सायं श्वेत आसन पर बैठकर स्फटिक की माला से पूर्व या दक्षिण-पूर्व दिशा की ओर मुख करके जप करें। अनुष्ठान में ४० दिनों के भीतर १६,००० मंत्र जपे जाते हैं 47।
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ॐ सिं सिद्ध्यै नमः स्वाहा ।
ugra mantraॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा
sabar mantraओम गुरु जी शिव बैठे कैलाश विष्णु बैठे बैकुंठ मेरी भक्ति शिव की शक्ति पूजू अमुक देव मनाऊं तो आवे ना आवे तो दुहाई शिव शंकर की दुहाई माता काली की दुहाई गुरु गोरखनाथ की 1
naam mantraराधा रानी
navgrah mantraॐ चित्रवर्णाय विद्महे सर्परूपाय धीमहि तन्नः केतुः प्रचोदयात्।
jap mantraॐ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा