एकादश रुद्र (विलोहित रुद्र) मूल मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं सं सं ह्रीं श्रीं संकर्षणाय ॐ
व्यक्तिगत आकर्षण शक्ति में वृद्धि, विपरीत परिस्थितियों का अनुकूलन, उच्चाटन से रक्षा एवं आध्यात्मिक बल की प्राप्ति 7।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
व्यक्तिगत आकर्षण शक्ति में वृद्धि, विपरीत परिस्थितियों का अनुकूलन, उच्चाटन से रक्षा एवं आध्यात्मिक बल की प्राप्ति 7।
इस मंत्र से क्या होगा?
व्यक्तिगत आकर्षण शक्ति में वृद्धि, विपरीत परिस्थितियों का अनुकूलन, उच्चाटन से रक्षा एवं आध्यात्मिक बल की प्राप्ति
जाप विधि
पवित्र स्थान पर एकाग्रता पूर्वक रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र का नियमित जप किया जाता है 7।
विशेष टिप्पणियाँ
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ॐ ह्रीं ऐं मातंग्यै नमः
navgrah mantraॐ अङ्गारकाय विद्महे शक्तिहस्ताय धीमहि तन्नो भौमः प्रचोदयात्।
bhakti mantraहरि ओम तत्सत जय गुरु दत्त
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kavach mantraसकलायुध सम्पूर्ण निखिलाङ्ग सुदर्शन यदम कवच दिव्यम परमानंद दायिनं सौदर्शन यो सदा शुद्ध पठे नरह तस्या सिद्धि विपुला करस्था भवति ध्रुवं कोष्माण्ड चण्ड भूता ये दुष्टा ग्रहा स्मृता पलायन्ते निशंभीता वर्मनोस्य प्रभावतः कुष्ठा पस्मा गुलमा व्याध कर्म हेतुका नश्य तन मंत्रिता भूपाना सप्त दिनावधी अनेन मन्त्रिता मृतानां तुलसी मूल संस्थितां ललाटे तिलकं कृत्वा मोहये त्रिजगन्नरः। 17