एकादश रुद्र (विलोहित रुद्र) मूल मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं सं सं ह्रीं श्रीं संकर्षणाय ॐ
व्यक्तिगत आकर्षण शक्ति में वृद्धि, विपरीत परिस्थितियों का अनुकूलन, उच्चाटन से रक्षा एवं आध्यात्मिक बल की प्राप्ति 7।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
व्यक्तिगत आकर्षण शक्ति में वृद्धि, विपरीत परिस्थितियों का अनुकूलन, उच्चाटन से रक्षा एवं आध्यात्मिक बल की प्राप्ति 7।
इस मंत्र से क्या होगा?
व्यक्तिगत आकर्षण शक्ति में वृद्धि, विपरीत परिस्थितियों का अनुकूलन, उच्चाटन से रक्षा एवं आध्यात्मिक बल की प्राप्ति
जाप विधि
पवित्र स्थान पर एकाग्रता पूर्वक रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र का नियमित जप किया जाता है 7।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
झाड़ि झाड़ि कापड़ पिन्दि । वीर मुष्टे बांधि बाल । बुले एलाम मशान भूम होते भैरव। कटार हाते। लोहार बाड़ी। बाम हाते चामदड़ि। आज्ञा दिल राजा चुडं हाते । लोहार किला । मुद्गर धिनि। विगलि घुंडिकार आज्ञे 25
ugra mantraह्रीं श्रीं हंसः ह्सौं स्वाहा
naam mantraराजीवलोचन
dhyan mantraध्येयः सदा सवितृमण्डलमध्यवर्ती नारायणः सरसिजासनसन्निविष्टः। केयूरवान्मकरकुण्डलवान् किरीटी हारी हिरण्मयवपुर्धृतशङ्खचक्रः॥
shanti mantraलोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
vaidik mantraॐ एह् ऊ षु ब्रवाणि तेऽग्न इत्थेतरा गिरः । एभिर्वर्धास इन्दुभिः ॥