ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
एकादश रुद्र (विलोहित रुद्र)

एकादश रुद्र (विलोहित रुद्र) मूल मंत्र

ॐ श्रीं ह्रीं सं सं ह्रीं श्रीं संकर्षणाय ॐ

व्यक्तिगत आकर्षण शक्ति में वृद्धि, विपरीत परिस्थितियों का अनुकूलन, उच्चाटन से रक्षा एवं आध्यात्मिक बल की प्राप्ति 7।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारमूल मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

व्यक्तिगत आकर्षण शक्ति में वृद्धि, विपरीत परिस्थितियों का अनुकूलन, उच्चाटन से रक्षा एवं आध्यात्मिक बल की प्राप्ति 7।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

व्यक्तिगत आकर्षण शक्ति में वृद्धि, विपरीत परिस्थितियों का अनुकूलन, उच्चाटन से रक्षा एवं आध्यात्मिक बल की प्राप्ति

जाप विधि

पवित्र स्थान पर एकाग्रता पूर्वक रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र का नियमित जप किया जाता है 7।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

tantrik mantra

ॐ ह्रीं ऐं मातंग्यै नमः

navgrah mantra

ॐ अङ्गारकाय विद्महे शक्तिहस्ताय धीमहि तन्नो भौमः प्रचोदयात्।

bhakti mantra

हरि ओम तत्सत जय गुरु दत्त

naam mantra

मुरुगन

vaidik mantra

ॐ यस्मिन्नृचः साम यजूंषि यस्मिन् प्रतिष्ठिता रथनाभाविवाराः । यस्मिंश्चित्तं सर्वमोतं प्रजानां तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु ।।

kavach mantra

सकलायुध सम्पूर्ण निखिलाङ्ग सुदर्शन यदम कवच दिव्यम परमानंद दायिनं सौदर्शन यो सदा शुद्ध पठे नरह तस्या सिद्धि विपुला करस्था भवति ध्रुवं कोष्माण्ड चण्ड भूता ये दुष्टा ग्रहा स्मृता पलायन्ते निशंभीता वर्मनोस्य प्रभावतः कुष्ठा पस्मा गुलमा व्याध कर्म हेतुका नश्य तन मंत्रिता भूपाना सप्त दिनावधी अनेन मन्त्रिता मृतानां तुलसी मूल संस्थितां ललाटे तिलकं कृत्वा मोहये त्रिजगन्नरः। 17