भगवान कार्तिकेय नाम मंत्र
मुरुगन
असीम शारीरिक सौंदर्य, ज्ञान और तमिल-भक्ति रस की प्राप्ति।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
असीम शारीरिक सौंदर्य, ज्ञान और तमिल-भक्ति रस की प्राप्ति।
इस मंत्र से क्या होगा?
असीम शारीरिक सौंदर्य, ज्ञान और तमिल-भक्ति रस की प्राप्ति
जाप विधि
तमिल/दक्षिण भारतीय परंपरा अनुसार सस्वर कीर्तन।
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योगीश्वरो महासेनः कार्तिकेयोऽग्निनन्दनः । स्कंदः कुमारः सेनानी स्वामी शंकरसंभवः ॥ गांगेयस्ताम्रचूडश्च ब्रह्मचारी शिखिध्वजः । तारकारिरुमापुत्रः क्रोधारिश्च षडाननः ॥ शब्दब्रह्मसमुद्रश्च सिद्धः सारस्वतो गुहः । सनत्कुमारो भगवान् भोगमोक्षफलप्रदः ॥ शरजन्मा गणाधीशः पूर्वजो मुक्तिमार्गकृत् । सर्वागमप्रणेता च वांछितार्थप्रदर्शनः ॥ अष्टाविंशतिनामानि मदीयानीति यः पठेत् । प्रत्यूषं श्रद्धया युक्तो मूको वाचस्पतिर्भवेत् ॥ महामंत्रमयानीति मम नामानुकीर्तनात् । महाप्रज्ञामवाप्नोति नात्र कार्या विचारणा ॥
sabar mantraॐ नमो काली कंकाली पीती भर भर रक्त प्याली चाम की गठड़ी हाड़ की माला भजो आनंद सुंदरी बाला भरपूर वसन कर ले उठाई काम क्रोध कलिका माई लेके अपनी भेंट कड़ाई अमुक की छाती घात चलाई घाट में मरघट कालिका आई कालिका ने अमुक की कच्ची कलेजी खाई न खाई तो कीनाराम औघड़ की दुहाई 12
vaidik mantraॐ ये ते पाशा वरुण सप्तसप्त त्रेधा तिष्ठन्ति विषिता रुशन्तः । छिनन्तु सर्वे अनृतं वदन्तं यः सत्यवाद्यति तं सृजन्तु ॥
mool mantraॐ शरवणभवाय नमः
navgrah mantraॐ भगभवाय विद्महे मृत्युरूपाय धीमहि तन्नः शनिः प्रचोदयात्।
bhakti mantraअच्युताय नमः, अनन्ताय नमः, गोविन्दाय नमः