मन / शिवसंकल्प सूक्त (३४.५) वैदिक मंत्र
ॐ यस्मिन्नृचः साम यजूंषि यस्मिन् प्रतिष्ठिता रथनाभाविवाराः । यस्मिंश्चित्तं सर्वमोतं प्रजानां तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु ।।
वेद-ज्ञान को धारण करने की क्षमता, स्मृति-दोष का निवारण एवं सम्पूर्ण बौद्धिक शक्तियों का एकत्रीकरण।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
वेद-ज्ञान को धारण करने की क्षमता, स्मृति-दोष का निवारण एवं सम्पूर्ण बौद्धिक शक्तियों का एकत्रीकरण।
इस मंत्र से क्या होगा?
वेद-ज्ञान को धारण करने की क्षमता, स्मृति-दोष का निवारण एवं सम्पूर्ण बौद्धिक शक्तियों का एकत्रीकरण
जाप विधि
स्वाध्याय या वेदाध्ययन प्रारम्भ करने से पूर्व, गुरु-स्मरण के पश्चात् ३ बार एकाग्र भाव से जप।
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ॐ ऐं श्रीं महालक्ष्म्यै कमल-वारिण्यै गरुड़ वाहिन्यै श्रीं ह्रीं ऐं स्वाहा।
shanti mantraॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्माऽमृतं गमय ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
mool mantraक्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजन वल्लभाय स्वाहा
dhyan mantraअहं ब्रह्मास्मि
beej mantraक्ष्रौं
stotra mantraत्वं यातुधानप्रमथप्रेतमातृपिशाचविप्रग्रहघोरदृष्टीन्। दरेन्द्र विद्रावय कृष्णपूरितो भीमस्वनोऽरेर्हृदयानि कम्पयन्।। 7