मन / शिवसंकल्प सूक्त (३४.५) वैदिक मंत्र
ॐ यस्मिन्नृचः साम यजूंषि यस्मिन् प्रतिष्ठिता रथनाभाविवाराः । यस्मिंश्चित्तं सर्वमोतं प्रजानां तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु ।।
वेद-ज्ञान को धारण करने की क्षमता, स्मृति-दोष का निवारण एवं सम्पूर्ण बौद्धिक शक्तियों का एकत्रीकरण।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
वेद-ज्ञान को धारण करने की क्षमता, स्मृति-दोष का निवारण एवं सम्पूर्ण बौद्धिक शक्तियों का एकत्रीकरण।
इस मंत्र से क्या होगा?
वेद-ज्ञान को धारण करने की क्षमता, स्मृति-दोष का निवारण एवं सम्पूर्ण बौद्धिक शक्तियों का एकत्रीकरण
जाप विधि
स्वाध्याय या वेदाध्ययन प्रारम्भ करने से पूर्व, गुरु-स्मरण के पश्चात् ३ बार एकाग्र भाव से जप।
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शं
kavach mantraऊरू रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृत्। जानुनी सेतुकृत् पातु जङ्घे दशमुखान्तकः। पादौ विभीषणश्रीदः पातु रामोऽखिलं वपुः। एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत्। स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत्। पातालभूतलव्योम- चारिणश्छद्मचारिणः। न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः। रामेति रामभद्रेति रामचन्द्रेति वा स्मरन्। नरो न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति। जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम्। यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः। वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत्। अव्याहताज्ञः सर्वत्र लभते जयमङ्गलम्। 34
stotra mantraत्वं तिग्मधारासिवरारिसैन्यमीशप्रयुक्तो मम छिन्धि छिन्धि। चर्मञ्छतचन्द्र छादय द्विषामघोनां हर पापचक्षुषाम्।। 7
mool mantraॐ श्री रामाय नमः
naam mantraवीणावादिनी
kaamya mantraॐ ह्रीं योगिनि योगिनि योगेश्वरि योग भयङ्करि सकल स्थावर जङ्गमस्य मुख हृदयं मम वशं आकर्षय आकर्षय नमः।