भगवान श्री सूर्य नारायण भक्ति मंत्र
ॐ आदित्याय नमः
ब्रह्मांड की मूल ऊर्जा के साथ जुड़ना और शारीरिक तथा मानसिक आरोग्यता प्राप्त करना 85।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
ब्रह्मांड की मूल ऊर्जा के साथ जुड़ना और शारीरिक तथा मानसिक आरोग्यता प्राप्त करना 85।
इस मंत्र से क्या होगा?
ब्रह्मांड की मूल ऊर्जा के साथ जुड़ना और शारीरिक तथा मानसिक आरोग्यता प्राप्त करना
जाप विधि
सूर्य देव के आदित्या स्वरूप (अदिति के पुत्र) का ध्यान करते हुए प्रातः काल इसका वाचिक या मानसिक जप किया जाता है 83।
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kaamya mantraत्वं वैष्णवी शक्तिरनन्तवीर्या विश्वस्य बीजं परमासि माया। सम्मोहितं देवि समस्तमेतत् त्वं वै प्रसन्ना भुवि मुक्तिहेतुः॥
kavach mantraस्कन्धौ पातु गजस्कन्धः स्तनौ विघ्नविनाशनः । हृदयं गणनाथस्तु हेरम्बो जठरं महान् ॥ धराधरः पातु पार्श्वौ पृष्ठं विघ्नहरः शुभः । लिङ्गं गुह्यं सदा पातु वक्रतुण्डो महाबलः ॥ गणक्रीडो जानुजङ्घे ऊरू मङ्गलमूर्तिमान् । एकदन्तो महाबुद्धिः पादौ गुल्फौ सदाऽवतु ॥ क्षिप्रप्रसादनो बाहू पाणी आशाप्रपूरकः । अङ्गुलीश्च नखान्पातु पद्महस्तोऽरिनाशनः ॥ सर्वाङ्गानि मयूरेशो विश्वव्यापी सदाऽवतु । अनुक्तमपि यत्स्थानं धूम्रकेतुः सदाऽवतु ॥ आमोदस्त्वग्रतः पातु प्रमोदः पृष्ठतोऽवतु । प्राच्यां रक्षतु बुद्धीश आग्नेय्यां सिद्धिदायकः ॥ दक्षिणस्यामुमापुत्रो नैऋत्यां तु गणेश्वरः । प्रतीच्यां विघ्नहर्ताऽव्याद्वायव्यां गजकर्णकः ॥ कौबेर्यां निधिपः पायादीशान्यामीशनन्दनः । दिवाऽव्यादेकदन्तस्तु रात्रौ सन्ध्यासु विघ्नहृत् ॥ 14