पीर बजरंगी (हनुमान शाबर सर्वकार्य सिद्धि) शाबर मंत्र
ॐ पीर बजरंगी राम लक्ष्मण के संगी, जहां जहां जाए, फतह के डंके बजाये, दुहाई माता अञ्जनि की आन 9
इस मंत्र का विशुद्ध तांत्रिक प्रयोजन किसी भी लौकिक कार्य (जैसे महत्वपूर्ण साक्षात्कार, जटिल न्यायालयीन प्रकरण, लंबी यात्रा, व्यापारिक समझौता, या जीवन की किसी कठिन चुनौती) में सर्वत्र विजय और सफलता ('फ
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
इस मंत्र का विशुद्ध तांत्रिक प्रयोजन किसी भी लौकिक कार्य (जैसे महत्वपूर्ण साक्षात्कार, जटिल न्यायालयीन प्रकरण, लंबी यात्रा, व्यापारिक समझौता, या जीवन की किसी कठिन चुनौती) में सर्वत्र विजय और सफलता ('फतह के डंके') सुनिश्चित करना है 9। यह मंत्र श्री हनुमान जी को उनकी माता अंजनी की 'आन' (कठोर शपथ) से बांधता है, जिससे ब्रह्मांडीय मारुति ऊर्जा साधक के साथ एक रक्षक, मार्गदर्शक और योद्धा (संगी) के रूप में यात्रा करती है और मार्ग में आने वाले सभी अदृश्य और दृश्य अवरोधों को नष्ट कर कार्य को पूर्णता तक पहुंचाती है 9।
इस मंत्र से क्या होगा?
इस मंत्र का विशुद्ध तांत्रिक प्रयोजन किसी भी लौकिक कार्य (जैसे महत्वपूर्ण साक्षात्कार, जटिल न्यायालयीन प्रकरण, लंबी यात्रा, व्यापारिक समझौता, या जीवन की किसी कठिन चुनौती) में सर्वत्र विजय और सफलता ('फतह के डंके') सुनिश्चित करना है 9
यह मंत्र श्री हनुमान जी को उनकी माता अंजनी की 'आन' (कठोर शपथ) से बांधता है, जिससे ब्रह्मांडीय मारुति ऊर्जा साधक के साथ एक रक्षक, मार्गदर्शक और योद्धा (संगी) के रूप में यात्रा करती है और मार्ग में आने वाले सभी अदृश्य और दृश्य अवरोधों को नष्ट कर कार्य को पूर्णता तक पहुंचाती है
जाप विधि
यह ग्रामीण लोक-परंपरा का एक अत्यंत सुगम किंतु अमोघ प्रभाव वाला शाबर प्रयोग है। इसके लिए किसी विशेष प्रकार के कठोर तंत्र-विधान, दिशा, या लंबी सिद्धि-प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होती। साधक को केवल स्नानादि से पूर्णतः शुद्ध होकर, घर से किसी विशेष, चुनौतीपूर्ण और महत्त्वपूर्ण कार्य के लिए प्रस्थान करने से ठीक पूर्व, अपनी दहलीज पर खड़े होकर या घर के पूजा स्थल में इस मंत्र का केवल 11 बार एकाग्रता के साथ मानसिक या वाचिक जप करना होता है 9। जप करते समय साधक को अपने अंतर्मन में माता अंजनी और भगवान राम-लक्ष्मण का स्मरण करना चाहिए तथा हनुमान जी (जिन्हें लोकभाषा में पीर बजरंगी कहा गया है) से विजय का स्पष्ट आशीर्वाद मांगना चाहिए 9।
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मेधां म इन्द्रो दधातु मेधां देवी सरस्वती । मेधां मे अश्विनावुभावाधत्तां पुष्करस्रजा । अप्सरासु च या मेधा गन्धर्वेषु च यन्मनः । दैवीं मेधा सरस्वती सा मां मेधा सुरभिर्जुषतां स्वाहा ॥
jap mantraॐ नमो भगवते वासुदेवाय
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navgrah mantraॐ ह्रां क्रीं टं ग्रहनाथाय बुधाय स्वाहा॥
bhakti mantraॐ श्री दुर्गायै नमः
dhyan mantraध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्। वामाङ्कारूढ सीतामुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं नानालङ्कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डनं रामचन्द्रम्॥