इन्द्र (वैदिक देवता) मूल मंत्र
ॐ ऐं इन्द्राय नमः (वैवाहिक सिद्धि हेतु: ॐ लं इन्द्राय नमः)
साहस, नेतृत्व क्षमता, शासकीय कार्यों में सफलता तथा भौतिक समृद्धि की प्राप्ति। 'लं' बीज युक्त मंत्र का प्रयोग विशेष रूप से वैवाहिक जीवन में आ रही देरी का निवारण एवं दांपत्य में सामंजस्य स्थापित करने हे
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
साहस, नेतृत्व क्षमता, शासकीय कार्यों में सफलता तथा भौतिक समृद्धि की प्राप्ति। 'लं' बीज युक्त मंत्र का प्रयोग विशेष रूप से वैवाहिक जीवन में आ रही देरी का निवारण एवं दांपत्य में सामंजस्य स्थापित करने हेतु किया जाता है 50।
इस मंत्र से क्या होगा?
साहस, नेतृत्व क्षमता, शासकीय कार्यों में सफलता तथा भौतिक समृद्धि की प्राप्ति
'लं' बीज युक्त मंत्र का प्रयोग विशेष रूप से वैवाहिक जीवन में आ रही देरी का निवारण एवं दांपत्य में सामंजस्य स्थापित करने हेतु किया जाता है
जाप विधि
प्रातःकाल पूर्व दिशा की ओर मुख करके पीले या लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष माला से १०८ बार जप करें। इन्द्राभिषेक या अनुष्ठान के समय इस मंत्र को गंध मिश्रित जल के कलश के समक्ष जपा जाता है 50।
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