महाकाली (द्वाविंशत्यक्षर मूल मंत्र) मूल मंत्र
ॐ क्रीं क्रीं क्रीं हूँ हूँ ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूँ हूँ ह्रीं ह्रीं स्वाहा
अकाल मृत्यु व प्रबल शत्रुओं का शमन, काले जादू एवं तंत्र-बाधा का विनाश, असीम निर्भयता, अज्ञान का नाश एवं परम शक्ति की प्राप्ति 35।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
अकाल मृत्यु व प्रबल शत्रुओं का शमन, काले जादू एवं तंत्र-बाधा का विनाश, असीम निर्भयता, अज्ञान का नाश एवं परम शक्ति की प्राप्ति 35।
इस मंत्र से क्या होगा?
अकाल मृत्यु व प्रबल शत्रुओं का शमन, काले जादू एवं तंत्र-बाधा का विनाश, असीम निर्भयता, अज्ञान का नाश एवं परम शक्ति की प्राप्ति
जाप विधि
रात्रि काल में (विशेषकर अमावस्या की मध्यरात्रि को) लाल या काले आसन पर बैठकर रुद्राक्ष माला से १०८ बार जप करें। यह उग्र तांत्रिक मंत्र है जिसे पूर्ण निष्ठा से जपा जाना चाहिए 35।
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प्रियंगुकलिकाश्यामं रूपेणाप्रतिमं बुधम्। सौम्यं सौम्यगुणोपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहम्॥
naam mantraवाणी
jap mantraॐ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा
siddh mantraॐ नमः उच्छिष्ट-गणेशाय हस्ति-पिशाचि-लिखे स्वाहा ।
bhakti mantraॐ श्री कालिकायै नमः
gyan mantraॐ श्री हयग्रीवाय नमः ॥