वैदिक देवता (वायु) नाम मंत्र
पवन
कार्यों में अभूतपूर्व गति, आलस्य का निवारण एवं मन की निर्मलता।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
कार्यों में अभूतपूर्व गति, आलस्य का निवारण एवं मन की निर्मलता।
इस मंत्र से क्या होगा?
कार्यों में अभूतपूर्व गति, आलस्य का निवारण एवं मन की निर्मलता
जाप विधि
तीव्र गति से कोई कार्य करते समय स्मरण।
विशेष टिप्पणियाँ
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उद्गीथ प्रणवोद्गीत सर्व वागीश्वरेश्वर । सर्व वेदमया चिन्त्यः सर्वं बोधय बोधय ॥
mool mantraॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः
jap mantraॐ सिद्धि वराय नमः
kaamya mantraज्ञानानन्दमयं देवं निर्मलस्फटिकाकृतिम्। आधारं सर्वविद्यानां हयग्रीवमुपास्महे॥
kavach mantraसकलायुध सम्पूर्ण निखिलाङ्ग सुदर्शन यदम कवच दिव्यम परमानंद दायिनं सौदर्शन यो सदा शुद्ध पठे नरह तस्या सिद्धि विपुला करस्था भवति ध्रुवं कोष्माण्ड चण्ड भूता ये दुष्टा ग्रहा स्मृता पलायन्ते निशंभीता वर्मनोस्य प्रभावतः कुष्ठा पस्मा गुलमा व्याध कर्म हेतुका नश्य तन मंत्रिता भूपाना सप्त दिनावधी अनेन मन्त्रिता मृतानां तुलसी मूल संस्थितां ललाटे तिलकं कृत्वा मोहये त्रिजगन्नरः। 17
sabar mantraॐ नमो काली कंकाली पीती भर भर रक्त प्याली चाम की गठड़ी हाड़ की माला भजो आनंद सुंदरी बाला भरपूर वसन कर ले उठाई काम क्रोध कलिका माई लेके अपनी भेंट कड़ाई अमुक की छाती घात चलाई घाट में मरघट कालिका आई कालिका ने अमुक की कच्ची कलेजी खाई न खाई तो कीनाराम औघड़ की दुहाई 12