कल्कि अवतार मूल मंत्र
ॐ कल्किने नमः
कलियुग के दोषों एवं पापों का शमन, धर्म की स्थापना, भविष्य के अज्ञात संकटों से सुरक्षा एवं आध्यात्मिक तथा भौतिक उन्नति 32।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
कलियुग के दोषों एवं पापों का शमन, धर्म की स्थापना, भविष्य के अज्ञात संकटों से सुरक्षा एवं आध्यात्मिक तथा भौतिक उन्नति 32।
इस मंत्र से क्या होगा?
कलियुग के दोषों एवं पापों का शमन, धर्म की स्थापना, भविष्य के अज्ञात संकटों से सुरक्षा एवं आध्यात्मिक तथा भौतिक उन्नति
जाप विधि
संध्या काल में पीले आसन पर बैठकर तुलसी की माला से १०८ बार निष्काम भाव से जप करें 32।
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ॐ बन्धय बन्धय मारय मारय नाशय नाशय हुं फट् स्वाहा
ugra mantraॐ नमो महादेव को काला भैरव काली रात भैरव चले अमावसरा आगे भैरव पीछे भैरव बाएं भैरव बाएं भैरव ऊपर पर आकाश भैरव नीचे पाताल भैरव पांच कोष पूरब बांध पांच कोष पश्चिम बांध पांच कोष उत्तर पांच कोष दक्षिण बांध जल थल वन गिरी गुफा बांध सात लोक सात पाताल नौ खंड बांध घर बांध दरवाजा बांध डाकनी साकनी पिशाचनी बांध भूत प्रेत वैताल खबीस चुड़ैल बांध मरघट कोशान शमशान की राख हवेरी की विद्या घोर क्रिया बांध भैरव की जंजीर चले हर बुरी बला दुष्ट शक्ति को बांध मृत्यु का भय काल की छाया समय की रेखा मंत्र की शक्ति तंत्र को प्रहार हाथ का खप्पर शत्रु का अस्त्रघात बांध हर बुरी बला दुष्ट शत्रु से रक्षा कर लीला ऐसा मार्ग खोले ना खुले जो खोले भैरव करंड से शत्रु नरक को जाए भाई शिव शंकर की दुहाई मदाकारी की ओम भैरवाय नमः
sabar mantraकाल भैरव का जो नाम ले नर नारी उसके लिए मूठ कभी ना पड़े भारी जय जय काल भैरव देव मूठ चली हवा बनकर काल भैरव चले ढाल बनकर अष्ट हाथ भैरव जी के फैले काट दी जड़ मूठ की चढ़ा दी आकाश नीचे काटी ऊपर काटी काट दी पाताल में 11
dhyan mantraमनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥
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