सूर्य देव (आदित्य) / आदित्यहृदय स्तोत्र (वाल्मीकि रामायण) स्तोत्र मंत्र
सर्वदेवात्मको ह्येष तेजस्वी रश्मिभावन: । नम उग्राय वीराय सारंगाय नमो नम: । कृतघ्नघ्नाय देवाय ज्योतिषां पतये नम: ॥ एष सुप्तेषु जागर्ति भूतेषु परिनिष्ठित: । 33
शत्रुओं पर विजय, पापों का नाश, चिंता व शोक की निवृत्ति, सरकारी कार्यों में सफलता और आयु वृद्धि 33।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
शत्रुओं पर विजय, पापों का नाश, चिंता व शोक की निवृत्ति, सरकारी कार्यों में सफलता और आयु वृद्धि 33।
इस मंत्र से क्या होगा?
शत्रुओं पर विजय, पापों का नाश, चिंता व शोक की निवृत्ति, सरकारी कार्यों में सफलता और आयु वृद्धि
जाप विधि
विनियोग व ध्यान के पश्चात् सूर्यदेव को जल अर्पण कर प्रातःकाल पाठ करें। संकट काल या युद्ध स्थिति में 3 बार पाठ करने का विधान है 33।
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ॐ आ कृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यं च। हिरण्ययेन सविता रथेना देवो याति भुवनानि पश्यन्।।
ugra mantraॐ नमो विपरीत-प्रत्यंगिरायै सहस्त्रानेक-कार्य-लोचनायै कोटि-विद्युज्जिह्वायै महा-व्याव्यापिन्यै संहार-रुपायै जन्म-शान्ति-कारिण्यै। मम स-परिवारकस्य भावि-भूत-भवच्छत्रून् स-दाराऽपत्यान् संहारय संहारय, महा-प्रभावं दर्शय दर्शय, हिलि हिलि, किलि किलि, मिलि मिलि, चिलि चिलि, भूरि भूरि, विद्युज्जिह्वे, ज्वल ज्वल, प्रज्वल प्रज्वल, ध्वंसय ध्वंसय, प्रध्वंसय प्रध्वंसय, ग्रासय ग्रासय, पिब पिब, नाशय नाशय, त्रासय त्रासय, वित्रासय वित्रासय, मारय मारय, विमारय विमारय, भ्रामय भ्रामय, विभ्रामय विभ्रामय, द्रावय द्रावय, विद्रावय विद्रावय हूं हूं फट् स्वाहा।।
mool mantraॐ नमो नारायणाय
dhyan mantraॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मा अमृतं गमय। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
shanti mantraलोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
jap mantraॐ ह्रीं ह्रीं वं वं ऐं ऐं मृतसंजीवनि विधे मृतमुत्थापयोत्थापय क्रीं ह्रीं ह्रीं वं स्वाहा