भगवान श्रीविष्णु / श्रीविष्णुसहस्रनाम स्तोत्रम् (महाभारत) स्तोत्र मंत्र
शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम् । प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये ॥ 10
मानसिक शांति, दुखों का समाधान, आध्यात्मिक उन्नति, कर्मों का फल और शुभ ऊर्जा का आकर्षण 11।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
मानसिक शांति, दुखों का समाधान, आध्यात्मिक उन्नति, कर्मों का फल और शुभ ऊर्जा का आकर्षण 11।
इस मंत्र से क्या होगा?
मानसिक शांति, दुखों का समाधान, आध्यात्मिक उन्नति, कर्मों का फल और शुभ ऊर्जा का आकर्षण
जाप विधि
स्नानादि के पश्चात् शुद्ध वस्त्र धारण कर एकांत में पूर्ण श्रद्धा के साथ प्रातः या सायं पाठ करें। विशेष इच्छा पूर्ति हेतु 21 दिनों तक प्रतिदिन 51 पाठ का विधान है 2।
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द्वारिकाधीश
siddh mantraउग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम् । नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम् ॥
sabar mantraओम चौकी हनुमत वीर की बाण ध्वजा फहराए मारू मारू मारुत सुत मुष्टिक शत्रु नसाय मेरे इष्ट रामचंद्र जी अगुवा हनुमंता वीर चौकी सुदर्शन चक्र की रक्षा करें शरीर टोना ब्रह्म भूत प्रेत संग डाईन डाकिनी सांप बिच्छू चोर बट सब कुछ निष्फल जाई 6
gyan mantraश्रीं ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा ॥
vaidik mantraॐ त्वमग्ने यज्ञानां होता विश्वेषां हितः । देवेभिर्मानुषे जने ॥
navgrah mantraॐ सौम्यरूपाय विद्महे बाणेशाय धीमहि तन्नो बुधः प्रचोदयात्।