नवग्रह (सूर्य) नाम मंत्र
सूर्य
नेतृत्व क्षमता, अपार आत्मविश्वास, यश, सरकारी कार्यों में सफलता एवं नेत्र ज्योति में वृद्धि।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
नेतृत्व क्षमता, अपार आत्मविश्वास, यश, सरकारी कार्यों में सफलता एवं नेत्र ज्योति में वृद्धि।
इस मंत्र से क्या होगा?
नेतृत्व क्षमता, अपार आत्मविश्वास, यश, सरकारी कार्यों में सफलता एवं नेत्र ज्योति में वृद्धि
जाप विधि
प्रातःकाल उगते हुए सूर्य को देखते हुए या अर्घ्य देते समय वैखरी उच्चारण।
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ॐ भूर्भुव: स्व: प्रांचामा पातु भूतेशः अग्ने पातु शंकर दक्षिणे पातुमा रुद्रो नैऋत्य स्थानु रेवच पश्चिमे खंड परशु वायव्या चंद्रशेखर उत्तरे गिरीशः पातु चैशान्य ईश्वर स्वयं उर्ध्वे मुंड सदा पातु चाध्य मृत्युंजय स्वयं जले स्थले चांदरीक्षे स्वप्ने जागरने सदा पिना कितुमा प्रीत्या भक्तम वैभक्त वत्सल य: सदा धारयेन्मर्त्य: शैवं कवचमुत्तमम् । न तस्य जायते क्वापि भयं शंभोरनुग्रहात् ॥ 30॥ इति अमोघ शिव कवच सम्पूर्ण ॥ 4
bhakti mantraगणेश शरणं शरणं गणेश
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navgrah mantraॐ अश्वध्वजाय विद्महे पाशहस्ताय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्।
vaidik mantraॐ वाङ् म आस्येऽस्तु। ॐ नसोर्मे प्राणोऽस्तु। ॐ अक्ष्णोर्मे चक्षुरस्तु। ॐ कर्णयोर्मे श्रोत्रमस्तु। ॐ बाह्वोर्मे बलमस्तु। ॐ ऊर्वोर्मे ओजोऽस्तु। ॐ अरिष्टानि मेऽङ्गानि तनूस्तन्वा मे सह सन्तु॥
shanti mantraॐ सह नाववतु । सह नौ भुनक्तु । सह वीर्यं करवावहै । तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥