भगवान (बलराम अवतार) नाम मंत्र
बलराम
भ्रातृ-प्रेम (भाई-चारे) में वृद्धि, अन्न-धन की पूर्णता एवं दुष्टों का संहार।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
भ्रातृ-प्रेम (भाई-चारे) में वृद्धि, अन्न-धन की पूर्णता एवं दुष्टों का संहार।
इस मंत्र से क्या होगा?
भ्रातृ-प्रेम (भाई-चारे) में वृद्धि, अन्न-धन की पूर्णता एवं दुष्टों का संहार
जाप विधि
हल या भूमि का ध्यान करते हुए वैखरी जप।
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sabar mantraधन जैसे चुंबक खींचे लोह गोरख की आज्ञा टले नहीं मिटे साधक का मोह कीड़ा जागे पिंगला जागे सुष्मना का खुले द्वार जब तीनों नाड़ी जागे धन आवे बारंबार जैसे गंगा बहे अविरल जैसे सूरज देत उजास वैसे मेरे घर में लक्ष्मी करे सदा ही वास रुका धन चले बंद धन खुले आवे चहुं ओर से धन गोरख का शब्द सांचा रे सांचा रे गुरु का मन काल का भी काल है गोरख तीनों लोक बसेरा जो गोरख का नाम ले साधक उसका होए उजेरा उठ उठ लक्ष्मी आव बैठ मेरे द्वार गोरख की आज्ञा लेकर आव कर मेरा उद्धार शब्द सांचा पिंड कांचा सांची गुरु की बानी हुकुम गोरखनाथ का चले यही नाथ की निशानी 5
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