भगवान विष्णु नाम मंत्र
पुण्डरीकाक्ष
दिनभर के कार्यों में पवित्रता, उत्तम दूरदृष्टि (Vision) एवं आत्मिक ज्ञान का प्रकाश।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
दिनभर के कार्यों में पवित्रता, उत्तम दूरदृष्टि (Vision) एवं आत्मिक ज्ञान का प्रकाश।
इस मंत्र से क्या होगा?
दिनभर के कार्यों में पवित्रता, उत्तम दूरदृष्टि (Vision) एवं आत्मिक ज्ञान का प्रकाश
जाप विधि
प्रातः नींद से उठते ही सर्वप्रथम भगवान के कमल-नेत्रों का ध्यान करते हुए स्मरण।
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इदं मे ब्रह्म च क्षत्रं चोभे श्रियमश्नुताम् । मयि देवा दधतु श्रियमुत्तमां तस्यै ते स्वाहा ॥
jap mantraॐ द्रां दत्तात्रेयाय नमः
mool mantraश्री राम जय राम कोदण्ड राम
kaamya mantraप्रणतानां प्रसीद त्वं देवि विश्वार्तिहारिणि। त्रैलोक्यवासिनामीड्ये लोकानां वरदा भव॥
kavach mantraसकलायुध सम्पूर्ण निखिलाङ्ग सुदर्शन यदम कवच दिव्यम परमानंद दायिनं सौदर्शन यो सदा शुद्ध पठे नरह तस्या सिद्धि विपुला करस्था भवति ध्रुवं कोष्माण्ड चण्ड भूता ये दुष्टा ग्रहा स्मृता पलायन्ते निशंभीता वर्मनोस्य प्रभावतः कुष्ठा पस्मा गुलमा व्याध कर्म हेतुका नश्य तन मंत्रिता भूपाना सप्त दिनावधी अनेन मन्त्रिता मृतानां तुलसी मूल संस्थितां ललाटे तिलकं कृत्वा मोहये त्रिजगन्नरः। 17
sabar mantraओम गुरु जी शिव बैठे कैलाश विष्णु बैठे बैकुंठ मेरी भक्ति शिव की शक्ति पूजू अमुक देव मनाऊं तो आवे ना आवे तो दुहाई शिव शंकर की दुहाई माता काली की दुहाई गुरु गोरखनाथ की 1