माँ लक्ष्मी नाम मंत्र
रमा
जीवन में निरंतर आनंद, विलास, मधुरता और मनोरंजन की प्राप्ति।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
जीवन में निरंतर आनंद, विलास, मधुरता और मनोरंजन की प्राप्ति।
इस मंत्र से क्या होगा?
जीवन में निरंतर आनंद, विलास, मधुरता और मनोरंजन की प्राप्ति
जाप विधि
सुखद भाव से चलते-फिरते मानसिक स्मरण।
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नासां वैवस्वत: पातु मुखं मे भास्कर: सदा । नाभिं गृहपति: पातु मन्द: पातु कटिं तथा । पदौ मन्दगति: पातु सर्वांग पातु पिप्पल: । आंगो पांगानी सर्वानी रक्षे में सूर्य नंदन इत्तेत कवच देव पठे सूर्य सुतस्य यह नतस्य जायते पीडा प्रीतो भवति सूर्य जह व्यय जन्म द्वितीय मृत्यु स्थान गतो पिवा कलस्थो गतो वापी सुप्रीतु सदाशनी अष्टमस्थे सूर्यसुते व्यये जन्म द्वितीयगे। कवचं पठते नित्यं न पीडा जायते क्वचित्। इत्य तत कवचम दिव्यम सौरे निर्मित पुरा जन्म लग्न स्थिता दोषा सर्वान नाश्यते प्रभु इति शनि कवच संपूर्णं ॥ 20
stotra mantraअच्युतं केशवं रामनारायणं कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम्। श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं जानकीनायकं रामचन्द्रं भजे।। 9
ugra mantraॐ ह्रीं मैं भीमाय नमः
navgrah mantraॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः॥
bhakti mantraहरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे
siddh mantraश्मशान भैरवि नररुधिरास्थि - वसाभक्षिणि सिद्धिं मे देहि मम मनोरथान् पूरय हुं फट् स्वाहा ॥