चंद्र नवग्रह मंत्र
ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः॥ (अथवा ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः)
चंद्र की मारक महादशा में आने वाले घोर कष्टों, अनिद्रा, मानसिक तनाव (Depression) और अस्थिरता को दूर कर रचनात्मकता, कलात्मक ज्ञान और सौम्यता में वृद्धि हेतु यह तांत्रोक्त बीज मंत्र जपा जाता है। 4
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
चंद्र की मारक महादशा में आने वाले घोर कष्टों, अनिद्रा, मानसिक तनाव (Depression) और अस्थिरता को दूर कर रचनात्मकता, कलात्मक ज्ञान और सौम्यता में वृद्धि हेतु यह तांत्रोक्त बीज मंत्र जपा जाता है। 4
इस मंत्र से क्या होगा?
चंद्र की मारक महादशा में आने वाले घोर कष्टों, अनिद्रा, मानसिक तनाव (Depression) और अस्थिरता को दूर कर रचनात्मकता, कलात्मक ज्ञान और सौम्यता में वृद्धि हेतु यह तांत्रोक्त बीज मंत्र जपा जाता है
जाप विधि
सोमवार की सायं या रात्रि से आरंभ कर चालीस दिन की अवधि में ग्यारह हजार बार जप पूर्ण करें। श्वेत वस्त्र धारण कर, श्वेत कुशा या ऊनी आसन पर बैठकर स्फटिक माला का उपयोग करना चाहिए। 9
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रीमे ह्रौं क्षं क्षेत्रपालाय काल भैरवाय नमः
kaamya mantraइन्द्रं वयं महाधन इन्द्रमर्भे हवामहे। युजं वृत्रेषु वज्रिणम्॥
sabar mantraझाड़ि झाड़ि कापड़ पिन्दि । वीर मुष्टे बांधि बाल । बुले एलाम मशान भूम होते भैरव। कटार हाते। लोहार बाड़ी। बाम हाते चामदड़ि। आज्ञा दिल राजा चुडं हाते । लोहार किला । मुद्गर धिनि। विगलि घुंडिकार आज्ञे 25
ugra mantraॐ ऐं ह्रीं श्रीं प्रत्यंगिरे मां रक्ष रक्ष मम शत्रून् भंजय-भंजय हुं फट् स्वाहा
naam mantraरमा
shanti mantraॐ वाङ् मे मनसि प्रतिष्ठिता । मनो मे वाचि प्रतिष्ठितम् । आविरावीर्म एधि । वेदस्य म आणीस्थः । श्रुतं मे मा प्रहासीः । अनेनाधीतेनाहोरात्रान्सन्दधामि । ऋतं वदिष्यामि । सत्यं वदिष्यामि । तन्मामवतु । तद्वक्तारमवतु । अवतु माम् । अवतु वक्तारम् । अवतु वक्तारम् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥