नवग्रह (चंद्र) नाम मंत्र
मयंक
काव्यात्मक प्रतिभा, सौंदर्य एवं आकर्षण में वृद्धि।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
काव्यात्मक प्रतिभा, सौंदर्य एवं आकर्षण में वृद्धि।
इस मंत्र से क्या होगा?
काव्यात्मक प्रतिभा, सौंदर्य एवं आकर्षण में वृद्धि
जाप विधि
कला या साहित्य की रचना करते समय स्मरण।
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ॐ नमो नृसिंहाय हिरण्यकश्यप-वक्ष-स्थल-विदारणाय त्रिभुवनव्यापकाय भूत, प्रेत, पिशाच, डाकिनी कुलोन्मूल नाशाय स्तम्भोद्भवाय समस्तदोषान् हर-हर विसर-विसर पच-पच-हन-हन-कम्पय-कम्पय मथ-मथ ह्रीं ह्रीं फट् फट् एह्येहि रुद्र आज्ञापयति स्वाहा
kavach mantraसकलायुध सम्पूर्ण निखिलाङ्ग सुदर्शन यदम कवच दिव्यम परमानंद दायिनं सौदर्शन यो सदा शुद्ध पठे नरह तस्या सिद्धि विपुला करस्था भवति ध्रुवं कोष्माण्ड चण्ड भूता ये दुष्टा ग्रहा स्मृता पलायन्ते निशंभीता वर्मनोस्य प्रभावतः कुष्ठा पस्मा गुलमा व्याध कर्म हेतुका नश्य तन मंत्रिता भूपाना सप्त दिनावधी अनेन मन्त्रिता मृतानां तुलसी मूल संस्थितां ललाटे तिलकं कृत्वा मोहये त्रिजगन्नरः। 17
beej mantraहौं
ugra mantraॐ ह्ल्रीं ह्ल्रीं उग्र तारे क्रीं क्रीं फट्
dhyan mantraअतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥
stotra mantraसिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि । मन्त्रमूर्ते सदा देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ 29