भगवान (वामनावतार) नाम मंत्र
त्रिविक्रम
संपूर्ण विश्व में कीर्ति का फैलाव एवं तीनों लोकों की सम्पदा (व्यापकता) की प्राप्ति।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
संपूर्ण विश्व में कीर्ति का फैलाव एवं तीनों लोकों की सम्पदा (व्यापकता) की प्राप्ति।
इस मंत्र से क्या होगा?
संपूर्ण विश्व में कीर्ति का फैलाव एवं तीनों लोकों की सम्पदा (व्यापकता) की प्राप्ति
जाप विधि
पदोन्नति या व्यवसाय विस्तार हेतु नित्य वैखरी जप।
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ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवाः । भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः । स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवागँसस्तनूभिः । व्यशेम देवहितं यदायूः । स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः । स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः । स्वस्ति नस्ताक्षर्यो अरिष्टनेमिः । स्वस्ति नो वृहस्पतिर्दधातु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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navgrah mantraॐ शनैश्चराय विद्महे छायापुत्राय धीमहि तन्नो मन्दः प्रचोदयात्।
stotra mantraनमस्ते गरुडारूढे कोलासुरभयंकरि । सर्वपापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ 29
beej mantraह्रां
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