भगवान गणेश नाम मंत्र
लम्बोदर
जीवन के सभी सुख-दुख, अपमान और रहस्यों को पचाने की शक्ति एवं उदारता का विकास।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
जीवन के सभी सुख-दुख, अपमान और रहस्यों को पचाने की शक्ति एवं उदारता का विकास।
इस मंत्र से क्या होगा?
जीवन के सभी सुख-दुख, अपमान और रहस्यों को पचाने की शक्ति एवं उदारता का विकास
जाप विधि
अन्न ग्रहण करने से पूर्व वैखरी उच्चारण या उदर पर ध्यान करते हुए।
विशेष टिप्पणियाँ
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ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्
kavach mantraनासां वैवस्वत: पातु मुखं मे भास्कर: सदा । नाभिं गृहपति: पातु मन्द: पातु कटिं तथा । पदौ मन्दगति: पातु सर्वांग पातु पिप्पल: । आंगो पांगानी सर्वानी रक्षे में सूर्य नंदन इत्तेत कवच देव पठे सूर्य सुतस्य यह नतस्य जायते पीडा प्रीतो भवति सूर्य जह व्यय जन्म द्वितीय मृत्यु स्थान गतो पिवा कलस्थो गतो वापी सुप्रीतु सदाशनी अष्टमस्थे सूर्यसुते व्यये जन्म द्वितीयगे। कवचं पठते नित्यं न पीडा जायते क्वचित्। इत्य तत कवचम दिव्यम सौरे निर्मित पुरा जन्म लग्न स्थिता दोषा सर्वान नाश्यते प्रभु इति शनि कवच संपूर्णं ॥ 20
beej mantraस्त्रीं
ugra mantraॐ क्रीं हूं क्रीं सर्व शत्रु स्तंभिनी घोर कालिकायै फट्
dhyan mantraवसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्। देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्॥
stotra mantraयन्नो भयं ग्रहेभ्यो भूत् केतुभ्यो नृभ्य एव च। सरीसृपेभ्यो दंष्ट्रिभ्यो भूतेभ्योंऽहोभ्य एव वा।। 7