नवग्रह (शुक्र) नाम मंत्र
उशना
संजीवनी विद्या (मृत को भी जीवित करने का कौशल) एवं कूटनीतिक सफलता।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
संजीवनी विद्या (मृत को भी जीवित करने का कौशल) एवं कूटनीतिक सफलता।
इस मंत्र से क्या होगा?
संजीवनी विद्या (मृत को भी जीवित करने का कौशल) एवं कूटनीतिक सफलता
जाप विधि
विपरीत परिस्थितियों में नीतिकुशलता हेतु मानसिक जप।
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यस्य स्मरणमात्रेण जन्मसंसारबन्धनात् । विमुच्यते नमस्तस्मै विष्णवे प्रभविष्णवे ॥ 1
ugra mantraॐ भम भैरवाय कम कम दुर्जन विनाशाय शत्रु नाशाय फट स्वाहा
gyan mantraअहं ब्रह्मास्मि
tantrik mantraॐ क्रीं क्रीं क्रीं ॐ ह्रीं ह्रीं हूं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा
sabar mantraभैरव शिव का चेला जहां जहां-जहां जाऊं नगर डगर लगे वहां फिर मेला शिव का धुना गोरख तापे काल कंटक थर थर कांपे मेरी रक्षा करें नवनाथ रामदूत हनुमंत रिद्धि सिद्धि आंगन विराजे माई अन्नपूर्णा सुखवंत शब्द सांचा पिंड काचा चलो मंत्र ईश्वर वाचा ओम गुरु जी गोरख जति मच्छिंद्र का चेला शिव के रूप में दिखे अलबेला कानों कुंडल गले में नादी हाथ त्रिशूल नाथ है आदि अलख पुरुष को करूं आदेश जन्म जन्म के काटो कलेश भगवा वेश हाथ में खप्पर भैरव शिव का चेला जहां जहां जाऊं नगर डगर लगे वहां फिर मेला शिव का धुना गोरख तापे काल कंटक थर थर कांपे मेरी रक्षा करें नवनाथ रामदूत हनुमंत रिद्धि सिद्धि आंगन विराजे माई अन्नपूर्णा सुखवंत शब्द सांचा पिंड कांचा चलो मंत्र ईश्वर वाचा 2
siddh mantraॐ हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा ।