वैदिक देवता (अग्नि) नाम मंत्र
हुताशन
अन्न का शरीर में सही पोषण, पापों का भस्म होना एवं यज्ञ-सिद्धि।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
अन्न का शरीर में सही पोषण, पापों का भस्म होना एवं यज्ञ-सिद्धि।
इस मंत्र से क्या होगा?
अन्न का शरीर में सही पोषण, पापों का भस्म होना एवं यज्ञ-सिद्धि
जाप विधि
भोजन करते समय या आहुति देते समय मानसिक स्मरण।
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मेधां मे वरुणो ददातु मेधामग्निः प्रजापतिः । मेधामिन्द्रश्च वायुश्च मेधां धाता ददातु मे स्वाहा ॥
jap mantraॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
mool mantraॐ सोमाय स्वाहा
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kavach mantraसकलायुध सम्पूर्ण निखिलाङ्ग सुदर्शन यदम कवच दिव्यम परमानंद दायिनं सौदर्शन यो सदा शुद्ध पठे नरह तस्या सिद्धि विपुला करस्था भवति ध्रुवं कोष्माण्ड चण्ड भूता ये दुष्टा ग्रहा स्मृता पलायन्ते निशंभीता वर्मनोस्य प्रभावतः कुष्ठा पस्मा गुलमा व्याध कर्म हेतुका नश्य तन मंत्रिता भूपाना सप्त दिनावधी अनेन मन्त्रिता मृतानां तुलसी मूल संस्थितां ललाटे तिलकं कृत्वा मोहये त्रिजगन्नरः। 17
sabar mantraॐ नमो आदेश गुरु का आदेश काली काली महाकाली इन्द्र की बेटी ब्रम्हा की साली चाम की गठरी हाड़ की माला भजो आनन्द सुंदरी बाला। भरपूर वसन करले उठाई काम क्रन्ति कलिका आई लुच्ची मोहन भोग भेट कड़ाही जहा भेजा वहा जाई कष्ट दुखो से लेव बचाई सभी देत्यन को मार भगाई आदि अंत तू रही सहाई में पूत तू मेरी माई सब दुखन से लेव बचाई गुरु की शक्ति हमारी भक्ति फुरे मंत्र दोहाई काली की ईश्वरो वाचा 12