माँ सरस्वती नाम मंत्र
वीणावादिनी
संगीत, गायन, वादन और ललित कलाओं में निपुणता एवं स्वर-सिद्धि।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
संगीत, गायन, वादन और ललित कलाओं में निपुणता एवं स्वर-सिद्धि।
इस मंत्र से क्या होगा?
संगीत, गायन, वादन और ललित कलाओं में निपुणता एवं स्वर-सिद्धि
जाप विधि
संगीत या किसी भी कला का अभ्यास करने से पूर्व जप।
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त्व्म्श्रीः
dhyan mantraया कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
sabar mantraओम ह्रीम नजर उतरजा कुरु कुरु स्वाहा 26
vaidik mantraॐ अग्ने विवस्वदा भरास्मभ्यमूतये महे । देवो हासि नो दृशे ॥
kavach mantraनासां वैवस्वत: पातु मुखं मे भास्कर: सदा । नाभिं गृहपति: पातु मन्द: पातु कटिं तथा । पदौ मन्दगति: पातु सर्वांग पातु पिप्पल: । आंगो पांगानी सर्वानी रक्षे में सूर्य नंदन इत्तेत कवच देव पठे सूर्य सुतस्य यह नतस्य जायते पीडा प्रीतो भवति सूर्य जह व्यय जन्म द्वितीय मृत्यु स्थान गतो पिवा कलस्थो गतो वापी सुप्रीतु सदाशनी अष्टमस्थे सूर्यसुते व्यये जन्म द्वितीयगे। कवचं पठते नित्यं न पीडा जायते क्वचित्। इत्य तत कवचम दिव्यम सौरे निर्मित पुरा जन्म लग्न स्थिता दोषा सर्वान नाश्यते प्रभु इति शनि कवच संपूर्णं ॥ 20
kaamya mantraश्रीं क्लीं श्रीं नमः॥