वैदिक देवता (वायु) नाम मंत्र
अनिल
श्वास-रोगों से मुक्ति एवं अदृश्य रहकर कार्यों को पूर्ण करने की क्षमता।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
श्वास-रोगों से मुक्ति एवं अदृश्य रहकर कार्यों को पूर्ण करने की क्षमता।
इस मंत्र से क्या होगा?
श्वास-रोगों से मुक्ति एवं अदृश्य रहकर कार्यों को पूर्ण करने की क्षमता
जाप विधि
श्वास को भीतर रोककर (कुम्भक) मानसिक स्मरण।
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या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
navgrah mantraॐ भगभवाय विद्महे मृत्युरूपाय धीमहि तन्नः शनिः प्रचोदयात्।
siddh mantraॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा ॥
tantrik mantraॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
sabar mantraराम कुण्डली, ब्रह्मचाक । तेतीस कोटि देवा देवा अमुक की बेड़ियां । अमुकेर अंकेर बाण काटम्। शर काटम् । संधान काटम् । कुज्ञान काटम् । कारवणे काटे । राजा रामचन्द्रेर आज्ञा । राजा रामचन्द्ररे ऐई झण्डी अमुकेर अंगे शीघ्र लागूगे 25
stotra mantraरामो राजमणि: सदा विजयते रामं रमेशं भजे । रामेणाभिहता निशाचरचमू रामाय तस्मै नम: । रामान्नास्ति परायणं परतरं रामस्य दासोऽस्म्यहम् । रामे चित्तलय: सदा भवतु मे भो राम मामुद्धर ॥ 16