नवग्रह (शनि) नाम मंत्र
शनि
साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्टों का त्वरित शमन, धैर्य, अनुशासन एवं रोजगार में स्थिरता।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्टों का त्वरित शमन, धैर्य, अनुशासन एवं रोजगार में स्थिरता।
इस मंत्र से क्या होगा?
साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्टों का त्वरित शमन, धैर्य, अनुशासन एवं रोजगार में स्थिरता
जाप विधि
शनिवार को पश्चिम दिशा की ओर मुख करके या चलते-फिरते मानसिक जप।
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ॐ नमो भगवते दक्षिणामूर्तये मह्यं मेधां प्रज्ञां प्रयच्छ स्वाहा ॥
vaidik mantraॐ यन्मे गर्भे वसतः पापमुग्रं यज्जायमानस्य च किंचिदन्यत् । तत्पवमानः पवित्रेण पुनातु ॥
sabar mantraभैरव शिव का चेला जहां जहां-जहां जाऊं नगर डगर लगे वहां फिर मेला शिव का धुना गोरख तापे काल कंटक थर थर कांपे मेरी रक्षा करें नवनाथ रामदूत हनुमंत रिद्धि सिद्धि आंगन विराजे माई अन्नपूर्णा सुखवंत शब्द सांचा पिंड काचा चलो मंत्र ईश्वर वाचा ओम गुरु जी गोरख जति मच्छिंद्र का चेला शिव के रूप में दिखे अलबेला कानों कुंडल गले में नादी हाथ त्रिशूल नाथ है आदि अलख पुरुष को करूं आदेश जन्म जन्म के काटो कलेश भगवा वेश हाथ में खप्पर भैरव शिव का चेला जहां जहां जाऊं नगर डगर लगे वहां फिर मेला शिव का धुना गोरख तापे काल कंटक थर थर कांपे मेरी रक्षा करें नवनाथ रामदूत हनुमंत रिद्धि सिद्धि आंगन विराजे माई अन्नपूर्णा सुखवंत शब्द सांचा पिंड कांचा चलो मंत्र ईश्वर वाचा 2
ugra mantraॐ भम भैरवाय कम कम दुर्जन विनाशाय शत्रु नाशाय फट स्वाहा
bhakti mantraॐ रामाय नमः
stotra mantraक्षीरोदन्वत्प्रदेशे शुचिमणिविलसत्सैकतेमौक्तिकानां मालाक्लृप्तासनस्थः स्फटिकमणिनिभैमौक्तिकैर्मण्डिताङ्गः। शुभ्रैरभ्रैरदभ्रैरुपरिविरचितैर्मुक्तपीयूष वर्षेः आनन्दी नः पुनीयादरिनलिनगदा शङ्खपाणिर्मुकुन्दः ॥ 10